MyMandirInstall

जब मैं था तब हरि नहीं, अब हरि हैं मैं नाहिं। प्रेम गली अति सांकरी, जामें दो न समाहिं॥ अर्थ: जब तक मेरे अंदर अहंकार ('मैं') था, तब तक ईश्वर ('हरि') नहीं मिले। जब अहंकार मिट गया, तब ईश्वर मिल गए

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!