
Rama Devi Sahu
463 days ago
🙏‼️ Radhey Radhey ‼️🙏 *आत्म-साक्षात्कार* *एक संन्यासी सारी दुनिया की यात्रा करके भारत वापस लौटा था । एक छोटी सी रियासत में मेहमान बना ।* *उस रियासत के राजा ने जाकर संन्यासी को कहा :- "स्वामी, एक प्रश्न मैं बीस वर्षो से निरंतर पूछ रहा हूँ । कोई उत्तर नहीं मिलता । क्या आप मुझे उत्तर देंगे ?"* *संन्यासी ने राजा से कहा :- "निसंदेह आज तुम खाली नहीं लौटोगे । निश्चित दूंगा । पूछो ।"* *राजा ने कहा- "मैं ईश्वर से मिलना चाहता हूँ । ईश्वर के बारे में समझाने की कोशिश मत करना । मैं सीधा मिलना चाहता हूँ ।"* *उस संन्यासी ने कहा:-"अभी मिलना चाहते हैं कि थोड़ी देर ठहर कर ?"* *राजा ने कहा: "माफ़ करिए , शायद आप समझे नहीं । मैं परम पिता परमात्मा की बात कर रहा हूँ , आप यह तो नहीं समझे कि कोई ईश्वर नाम वाले व्यक्ति की बात कर रहा हूँ ; जो आप कह रहे हैं कि अभी मिलना है कि थोड़ी देर रुक सकते हो ?"* *संन्यासी ने कहा: "महानुभाव, भूलने की कोई गुंजाइश नहीं है । मैं तो चौबीस घंटे परमात्मा से मिलाने का ही धंधा करता हूँ । अभी मिलना है कि थोड़ी देर रुक सकते हैं, सीधा जवाब दें । तुम तो बीस साल से भगवान से मिलने को उत्सुक हो और आज वक्त आ गया तो मिल लो ।"* *राजा ने हिम्मत की और कहा: "अच्छा मैं अभी मिलना चाहता हूँ मिला दीजिए ।"* *संन्यासी ने कहा-"इस छोटे से कागज पर अपना नाम पता लिख दो ताकि मैं भगवान के पास पहुंचा दूं कि आप कौन हैं !!"* *राजा ने अपना नाम, अपना महल का नाम, अपना परिचय, अपनी उपाधियां लिखकर उन्हें दी !* *तब वह संन्यासी बोला कि- "महाशय, ये सब बाते मुझे झूठ और असत्य मालूम होती हैं जो आपने कागज पर लिखीं हैं ।"* *राजा हतप्रभ था कि इस सन्यासी को मेरे परिचय पर संदेह क्यों हो रहा है ?* *संन्यासी ने कहा:- "अगर तुम्हारा नाम बदल दें तो क्या तुम बदल जाओगे ? तुम्हारी चेतना, तुम्हारी सत्ता, तुम्हारा व्यक्तित्व दूसरा हो जाएगा ?"* *उस राजा ने कहा : "नहीं, नाम के बदलने से मैं क्यों बदलूंगा ? नाम, नाम है, और मैं, मैं हूँ !"* *तो संन्यासी ने कहा : "एक बात तो तय हो गई कि नाम तुम्हारा परिचय नहीं है, क्योंकि तुम उसके बदलने से बदलते नहीं ।"* *"आज तुम राजा हो, कल गांव के भिखारी हो जाओगे तो क्या बदल जाओगे ?"* *उस राजा ने कहा : "नहीं, अगर मेरा राज्य चला जाएगा, मैं भिखारी भी हो जाऊंगा, लेकिन मैं क्यों बदल जाऊंगा ? मैं तो जो हूँ , सो हूँ । राजा होकर जो हूँ , भिखारी होकर भी वही रहूँगा ! अगर महल, राज्य और धन-संपति नहीं भी होगी तो भी मैं तो वही रहूंगा जो मैं हूँ !"* *फिर संन्यासी ने कहा : "तो तय हो गई दूसरी बात कि राज्य तुम्हारा परिचय नहीं है, क्योंकि राज्य छिन जाए तो भी तुम बदलते नहीं ।"* *"अब ये बताओ तुम्हारी उम्र कितनी है ?"* *राजा ने कहा : "चालीस वर्ष !"* *संन्यासी ने कहा: "तो पचास वर्ष के होकर क्या तुम कुछ और हो जाओगे ? जब तुम बीस वर्ष या जब बच्चे थे तो क्या तब तुम कोई और थे ?"* *उस राजा ने कहा : "नहीं उम्र बदलती है, शरीर बदलता है लेकिन मैं कभी नहीं बदला ! मैं तो जो बचपन में था, जो मेरे भीतर था, वह आज भी है !"* *संन्यासी ने कहा : "अब तो उम्र भी तुम्हारा परिचय नहीं रहा, शरीर भी तुम्हारा परिचय नहीं रहा !"* *अब अपना असली परिचय लिखकर दो कि असलियत में तुम कौन हो ? अगर वह आप लिख दोगे तो मैं उसे भगवान के पास पहुंचा दूंगा, अन्यथा गलत जानकारी देने के कारण मैं भी झूठा बनूंगा तुम्हारे साथ ! अभी तक तुम स्वयं बतला चुके हो कि अब तक का दिया परिचय तुम्हारा नहीं है।"* *राजा बोला : "अब तो बड़ी कठिनाई हो गई । उसे तो मैं भी नहीं जानता ! आखिर जो मैं हूँ , उसे तो मैं नहीं जानता ! अब तक मैं इन्हीं को अपना परिचय समझता था !"* *संन्यासी ने कहा : "मेरे लिये भी यह धर्म संकट है कि जिसका मैं परिचय भी न दे सकूं, बता भी न सकूं कि कौन मिलना चाहता है, तो भगवान भी क्या कहेंगे कि किसको मिलाना चाहता है ?"* *"तो जाओ पहले इसको खोज लो कि तुम कौन हो ?"* *"और मैं तुम्हें वचन देता हूँ कि जिस दिन तुम यह जान लोगे कि तुम कौन हो, उस दिन तुम्हें भगवान को खोजने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, क्योंकि स्वयं को जानने में ही वह भी जान लिया जाएगा जो परमात्मा है यानी जिसने खुद को जान लिया उसने परमात्मा को पा लिया !* *खुद के बोध के लिए सदगुरु की शरणागत होना होगा तभी साक्षात् परम ब्रह्म का दर्शन हो पायेगा !* *जिसने भी वह दर्शन किया, अपने अन्दर जीते जी किया ।* *यह कहानी आत्म-साक्षात्कार का गहरा संदेश देती है। असल में, यह बताती है कि भगवान को बाहरी रूप में तलाशने के बजाय, स्वयं को पहचानना और अपने वास्तविक स्वरूप का बोध करना जरूरी है ।* *इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि जो व्यक्ति अपने असली स्वरूप को जान लेता है, उसे ईश्वर को अलग से खोजने की आवश्यकता नहीं होती ।* *आपका समय शुभ व आनंदमय हो*
Comments (3)

Suresh Kumar
May 25, 2025
राधे राधे जी 🌹🙏🌹

Runa Sinha
May 25, 2025
जय श्री राम 🙏

Anup Kumar Sinha
May 25, 2025
जय श्री राम 🙏🙏
