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।।श्रीहरिः।। *प्रश्न:- शरीर को हम अपना मानते रहें और फिर भगवान का भजन करते रहें तो क्या इससे तत्त्व का बोध हो जायेगा?* परम श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदास महाराज का उत्तर :- हो जायेगा हो जायेगा शरीर को अपना मानते हुए भी। देखिये शरीर को अपना न माने यह ज्ञानयोग की बात है। ...........भक्तिमार्ग में शरीर मैं हूँ, मेरा है, नहीं है इसकी खास आवश्यकता नहीं है। भक्तिमार्ग में तो मैं भगवान का हूँ.............. आप शरीर है या नहीं है इसमें ज्यादा पंचायती नहीं है।............ यह बात परम श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदास महाराज ने सीकर (राजस्थान) के चातुर्मास कार्यक्रम के अन्तर्गत दिनांक 26-7-1997 को रात्रि 8:00 बजे के प्रवचन में 10 मिनट बाद कही है।

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