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Rama Devi Sahu

25 days ago

🦚 मुगलों के आक्रमण के बाद कहाँ गईं वृंदावन की प्राचीन कृष्ण प्रतिमाएं? वृंदावन... वह पावन भूमि जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी मधुर बाललीलाएं कीं। आज हम आपको वृंदावन से जुड़े श्रीकृष्ण के 7 ऐसे चमत्कारी और ऐतिहासिक विग्रहों (प्रतिमाओं) के बारे में बता रहे हैं, जिनका इतिहास बेहद अद्भुत है। इनमें से 3 आज भी वृंदावन में विराजमान हैं, जबकि 4 अन्य स्थानों पर दर्शन दे रहे हैं: 1. श्री गोविंद देवजी (जयपुर) 🌸 रूप गोस्वामी जी को सन् 1535 में यह मूर्ति वृंदावन के गौमा टीला से मिली थी। बाद में आमेर नरेश मानसिंह ने इनका भव्य मंदिर बनवाया। औरंगजेब के आक्रमण के समय, भक्त इन्हें सुरक्षित जयपुर ले गए। तब से हमारे गोविंद देवजी जयपुर के राजकीय (महल) मंदिर में विराजमान हैं। 2. श्री मदन मोहनजी (करौली) 🌸 अद्वैतप्रभु जी को यह प्रतिमा कालीदह के पास द्वादशादित्य टीले से प्राप्त हुई थी। मुगल आक्रमण के दौरान इन्हें भी जयपुर ले जाया गया। कालांतर में करौली (राजस्थान) के राजा गोपालसिंह ने अपने राजमहल के पास भव्य मंदिर बनवाकर इन्हें स्थापित किया, जहाँ ये आज भी दर्शन दे रहे हैं। 3. श्री गोपीनाथजी (जयपुर) 🌸 यमुना किनारे वंशीवट पर संत परमानंद भट्ट जी को यह दिव्य मूर्ति मिली थी। मुगलों के हमले के समय इन्हें भी जयपुर ले जाया गया। आज गोपीनाथजी जयपुर की पुरानी बस्ती स्थित मंदिर में भक्तों की मनोकामनाएं पूरी कर रहे हैं। 4. श्री जुगलकिशोर जी (पन्ना) 🌸 सन् 1563 (वि.सं. 1620) में हरिरामजी व्यास को वृंदावन के किशोरवन में यह प्रतिमा मिली। ओरछा नरेश ने इनका मंदिर बनवाया, लेकिन मुगलिया हमले के कारण इन्हें पन्ना (मध्य प्रदेश) ले जाया गया, जहाँ ये आज भी विराजमान हैं। 5. श्री राधारमणजी (वृंदावन) 🌸 यह वृंदावन की एकमात्र ऐसी प्राचीन प्रतिमा है जो मुगलों के हमले के बाद भी वृंदावन से बाहर नहीं गई! शालिग्राम शिला से स्वयं प्रकट हुई इस मूर्ति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनका जन्माष्टमी अभिषेक रात 12 बजे की बजाय दोपहर 12 बजे होता है, क्योंकि मान्यता है कि ठाकुरजी सुकोमल हैं, उन्हें रात में जगाना ठीक नहीं। 6. श्री राधाबल्लभजी (वृंदावन) 🌸 हित हरिवंशजी को यह अति-सुंदर प्रतिमा दहेज में मिली थी। मुगलों के समय इन्हें कुछ समय के लिए कामा (राजस्थान) ले जाया गया था, पर बाद में भक्त इन्हें पुनः वृंदावन ले आए और नवनिर्मित मंदिर में प्रतिष्ठित किया। 7. श्री बांकेबिहारीजी (वृंदावन) 🌸 निधिवन में स्वामी हरिदासजी की भक्ति से प्रकट हुए हमारे प्यारे बांकेबिहारी जी! मुगलों के आक्रमण के समय इन्हें भरतपुर ले जाया गया था, पर बाद में ये फिर से वृंदावन में प्रतिष्ठित हुए। इनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ साल में केवल एक दिन (जन्माष्टमी के बाद भोर में) ही मंगला आरती होती है। 👇 कमेंट में बताएं: इन 7 में से आपने किन-किन स्वरूपों के दर्शन किए हैं? ।। जय श्री कृष्ण ।। ।। राधे राधे ।। 🙏🦚

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Comments (3)

Shah  🩷

Shah 🩷

Aug 6, 2026

बिल्कुल सही बात🙏 है राधे-राधे 🩷सुप्रभात🌹

Rama Devi Sahu

Rama Devi Sahu

Aug 6, 2026

जीभ जन्म से होती है, और मृत्यु तक रहती है क्यो कि वह कोमल होती है. दाॅत जन्म के बाद आते है और मृत्यु से पहले जाते है, क्यो कि वह कठोर होते है. कोमल रहिए कठोर नही। जिंदगी कुछ भी नही दोहरायेगी, जो यादे समेट सको, समेट लो। जय श्री कृष्णा राधे राधे शुभ संध्या वंदन जी 🙏🙏

Shah  🩷

Shah 🩷

Aug 5, 2026

शुभ संध्या वंदन🌹 *🪷 ।। जय श्री कृष्ण ।।🪷*