
Rama Devi Sahu
72 days ago
१. त्रिकुट पर्वत वासिनी, कलियुग की आधार। त्रिकुट पर्वत वासिनी: इसका अर्थ है माता वैष्णो देवी, जो जम्मू की पहाड़ियों में स्थित 'त्रिकुट पर्वत' की पवित्र गुफा में निवास करती हैं। तीन चोटियों वाले इस पर्वत को माता का साक्षात् रूप माना जाता है। कलियुग की आधार: हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, कलियुग में माता वैष्णो देवी को शक्ति का मुख्य स्तंभ और भक्तों का सबसे बड़ा सहारा माना गया है। वे इस कठिन युग में धर्म और मानवता की रक्षा करने वाली मुख्य शक्ति (आधार) हैं। २. शरण पड़ा जो आ गया, कर देतीं उद्धार।। शरण पड़ा जो आ गया: माता का दरबार सबके लिए खुला है। जो भी व्यक्ति अहंकार त्यागकर, सच्चे मन से उनकी शरण में आता है या उनके पास अपनी पुकार लेकर पहुँचता है। कर देतीं उद्धार: माता उसे खाली हाथ नहीं लौटातीं। वे उसके दुखों, पापों और जीवन के कष्टों का अंत कर उसका 'उद्धार' (कल्याण) कर देती हैं। यहाँ उद्धार का अर्थ केवल सांसारिक सफलता नहीं, बल्कि मानसिक शांति और मोक्ष से भी है। संक्षेप में: यह दोहा बताता है कि माँ वैष्णो देवी त्रिकुट पर्वत पर विराजमान होकर पूरे संसार को संभाल रही हैं। कलियुग के इस समय में, जहाँ मनुष्य भ्रमित और परेशान है, वहाँ माता की भक्ति ही एकमात्र सहारा है। जो भक्त उनके चरणों में खुद को समर्पित कर देता है, माता उसकी नैया पार लगा देती हैं। जय माता दी!

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