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पंच प्राण – शरीर की सूक्ष्म ऊर्जा प्रणाली का आधार। पंच प्राण - शरीर के पंच प्राण या पंच वायु। प्राण' शब्द उस महत्वपूर्ण जीवन शक्ति या ऊर्जा को संदर्भित करता है जो हमारे भीतर मौजूद है। जिसके द्वारा शरीर जीवित है। जो हमारे अंदर प्राण है वह यही वायु होती है । सभी पांच प्राण के अपने अपने कार्य हैं और स्थान भी निश्चित है। पंच प्राण 👇👇👇👇👇 1. प्राण 2. उदान 3. व्यान 4. समान 5. अपान 1️⃣ प्राण (Prana Vayu) स्थान: हृदय व छाती क्षेत्र कार्य: श्वास लेना, हृदय की क्रिया, जीवन ऊर्जा का मुख्य स्रोत 👉 यह अंदर की ओर और ऊपर की दिशा में कार्य करता है। 2️⃣ उदान (Udana Vayu) स्थान: कंठ व गला क्षेत्र कार्य: वाणी, अभिव्यक्ति, स्मरण शक्ति, चेतना का उत्थान। 3️⃣ व्यान (Vyana Vayu) स्थान: सम्पूर्ण शरीर में कार्य: रक्त संचार, स्नायु तंत्र का संचालन, पूरे शरीर में ऊर्जा का प्रवाह 👉 यह सर्वव्यापी है और पूरे शरीर में कार्य करता है। 4️⃣ समान (Samana Vayu) स्थान: नाभि क्षेत्र (मणिपुर चक्र) कार्य: पाचन, भोजन का पाचन व पोषक तत्वों का वितरण 👉 यह शरीर में संतुलन बनाने का कार्य करता है। 5️⃣ अपान (Apana Vayu) स्थान: नाभि के नीचे का भाग (मूलाधार क्षेत्र) कार्य: मल-मूत्र त्याग, प्रसव, शरीर से विषैले पदार्थों का निष्कासन 👉 यह नीचे की दिशा में कार्य करता है।

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