
Rama Devi Sahu
315 days ago
*🌞~ आज का हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 20 अक्टूबर 2025* *⛅दिन - सोमवार* *⛅विक्रम संवत् - 2082* *⛅अयन - दक्षिणायण* *⛅ऋतु - शरद* *⛅मास - कार्तिक* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅ तिथि - चतुर्दशी दोपहर 03:44 तत्पश्चात् अमावस्या* *⛅नक्षत्र - हस्त रात्रि 08:17 तक तत्पश्चात् चित्रा* *⛅योग - वैधृति रात्रि 02:35 अक्टूबर 21 तक तत्पश्चात् विष्कम्भ* *⛅राहुकाल - सुबह 07:52 से सुबह 09:19 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:26* *⛅सूर्यास्त - 05:57 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पूर्व दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:46 से प्रातः 05:36 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - सुबह 11:48 से दोपहर 12:34 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - रात्रि 11:47 से रात्रि 12:37 अक्टूबर 21 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅️व्रत पर्व विवरण - नरक चतुर्दशी (तैलाभ्यंग स्नान), दीपावली, सोमवती अमावस्या (दोपहर 03:44 से 21 अक्टूबर सूर्योदय), लक्ष्मी पूजा, काली पूजा, शारदा पूजा, चोपड़ा पूजा, केदार गौरी व्रत, कमला जयंती* *🌥️विशेष - अमावस्या को स्त्री-सहवास तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* *🔹जैविक घड़ी पर आधारित दिनचर्या🔹* *(Biological Clock Based on Routine)* *🔹प्रातः ३ से ५ - (जीवनी शक्ति विशेषरूप से फेफडों में होती है)🔹* *🔹थोड़ा गुनगुना पानी पीकर खुली हवा में घूमना एवं प्राणायाम करना । शरीर स्वस्थ व स्फूर्तिमान होता है । ब्राह्ममुहूर्त में उठनेवाले लोग बुद्धिमान व उत्साही होते हैं और सोते रहनेवालों का जीवन निस्तेज हो जाता है ।* *🔹प्रातः ५ से ७ - (बड़ी आँत में)🔹* *प्रातः जागरण से लेकर सुबह ७ बजे के बीच मल-त्याग एवं स्नान कर लेना चाहिए । सुबह ७ बजे के बाद जो मल-त्याग करते हैं उन्हें अनेक बीमारियाँ होती हैं ।* *🔹सुबह ७ से ९ - (अमाशय यानी जठर में)🔹* *इस समय (भोजन के २ घंटे पूर्व) दूध अथवा फलों का रस या कोई पेय पदार्थ ले सकते हैं ।* *🔹९ से ११ - (अग्न्याशय व प्लीहा में)🔹* *यह समय भोजन के लिए उपयुक्त है । भोजन के बीच-बीच में गुनगुना पानी (अनुकूलता अनुसार) घूँट-घूँट पियें ।* *🔹दोपहर ११ से १ - (हृदय में)🔹* *दोपहर १२ बजे के आसपास मध्याङ्घ-संध्या करने का हमारी संस्कृति में विधान है । भोजन वर्जित ।* *🔹दोपहर १ से ३ - (छोटी आँत में)🔹* *भोजन के करीब २ घंटे बाद प्यास-अनुरूप पानी पीना चाहिए । इस समय भोजन करने अथवा सोने से पोषक आहार-रस के शोषण में अवरोध उत्पन्न होता है व शरीर रोगी तथा दुर्बल हो जाता है ।* *🔹दोप. ३ से ५ - (मूत्राशय में)🔹* *२-४ घंटे पहले पिये पानी से इस समय मूत्र-त्याग की प्रवृत्ति होगी ।* *🔹शाम ५ से ७ - (गुर्दे में)🔹* *इस समय हलका भोजन कर लेना चाहिए । सूर्यास्त के १० मिनट पहले से १० मिनट बाद तक (संध्याकाल में) भोजन न करें । शाम को भोजन के तीन घंटे बाद दूध पी सकते हैं ।* *🔹रात्रि ७ से ९ - (मस्तिष्क में)🔹* *इस समय मस्तिष्क विशेष रूप से सक्रिय रहता है । अतः प्रातःकाल के अलावा इस काल में पढ़ा हुआ पाठ जल्दी याद रह जाता है ।* *🔹रात्रि ९ से ११ - (रीढ़ की हड्डी में स्थित मेरुरज्जू में)🔹* *इस समय की नींद सर्वाधिक विश्रांति प्रदान करती है । इस समय का जागरण शरीर व बुद्धि को थका देता है ।* *🔹रात्रि ११ से १ - (पित्ताशय में)🔹* *इस समय का जागरण पित्त-विकार, अनिद्रा, नेत्ररोग उत्पन्न करता है व बुढ़ापा जल्दी लाता है । इस समय नई कोशिकाएँ बनती हैं ।* *🔹१ से ३ - (यकृत में)🔹* *इस समय का जागरण यकृत (लीवर) व पाचन तंत्र को बिगाड़ देता है ।* *🌹ऋषियों व आयुर्वेदाचार्यों ने बिना भूख लगे भोजन करना वर्जित बताया है । अतः प्रातः एवं शाम के भोजन की मात्रा ऐसी रखें, जिससे ऊपर बताये समय में खुलकर भूख लगे ।* *🌞🚩🚩 *" ll जय श्री राम ll "* 🚩🚩🌞*

Comments (1)

murarimishra
Oct 20, 2025
jay agree ram
