
Rama Devi Sahu
253 days ago
*सुप्रभात वंदन* *बिंदास मुस्कुराओ क्या गम है, जिंदगी में टेंशन किसको कम है*। *अच्छा या बुरा तो केवल भ्रम है,जिंदगी का नाम ही कभी खुशी कभी ग़म है*। *जो प्रकृति की इस बात को समझ लेता है कि सर्दी जाती है गर्मी आ जाती है, गर्मी जाती है बरसात आ जाती है, ऋतुएं बदलती है, मौसम बदलते हैं, सूरज चांद-तारों के स्वरूप बदल जाया करते हैं तो गम कैसा!! अरे यहां तो इंसान ही बदल जाता है। बच्चा था कभी, फिर जवान और बूढ़ा भी हो गया और एक दिन संसार से विदा हो जाएगा। रिश्ते-नाते बदलते हैं, प्यार करने वाली सासु बदल जाती है, इज्जत देने वाली बहुएं बदल जाती है, खुद की कोख से पैदा हुआ पुत्र बदल जाता है, वह भी बीता, यह भी बीत जाएगा। जो इस रहस्य को समझ लेता है वह सुख-दुख की उठा पटक से मुक्त हो जाता है...* *जय सियाराम*
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