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जीवन को सार्थक रूप से जिये 💐🌹💐🌹🍁💐 बात बिल्कुल सही है और मेरे अपने अनुभव की है । बचपन से 73 वर्ष की आयु की यात्रा उतार-चढ़ाव से गुजर कर आज एक पडाव पर जिंदगी जा पहुंची है । 🌹🍁🌹🍁 और कदम दर कदम आगे चलकर उदेश्य की पूरा करने की दिशा मे ईश्वर की महान कृपा अनुभूत है । समाजिक कार्य ,आध्यात्मिक चिंतन मनन, साथ ही साथ संसारिक वातावरण का अध्ययन कर स्थिति यो के मध्य सामंजस्य स्थापित कर उतम मार्ग प्रशस्त कर बढ जाना ही उचित समाधान है। 💐💐💐 संसार का वर्तमान स्वरूप मनुष्य समुदाय को उसी तरह जीने के लिए विवश कर देता है । वातावरण संस्कार को छीन कर एक नया स्वरूप लेकर सामने आ खडा होता है । संसार वर्तमान मे पारंगत विचारधाराओ का खंडन कर नवीनतम तकनीक पर बढ़कर जीना प्रारम्भ कर देता है । 🌹🍁🍁🌹 पीछे छूटा जाता है इतिहास हमने देखा नवीनीकरण होते । हमने देखा नयी सभ्यता को जन्म लेते । 💐🌹🍁 धर्म, अर्थ, राजनीति, सामाजिक कार्य, आध्यात्मिक, सभी विषय के अस्तित्व पर वर्तमान के प्रभाव ने परिवर्तन की मोहर लगा दी है । अतः यथाकाल वैचारिक विकास भी आवस्यक है । और सार्थक जीवन जीने के सरल उपाय है । निष्कर्ष 💐🌹💐🌹 वातावरण के अनुसार अपने को समायोजित कर सरलता से , सादगी से,बिना विवाद के,मिलनसार होकर,सबका हित सोचे,और जीवन को सार्थक बनाकर सकारात्मक रूप प्रदान कर जिये । सुख दुःख बदलते रहते है। निराश और बेचैन ना हो । जय जय श्री राम जी गाते हनुमान जी गाते हनुमान जी जय जय श्री राम जी 🙏💐🙏💐 डा रवींद्र खरे नागपुर

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