
Rama Devi Sahu
30 days ago
*🌞~ वैदिक हिन्दू पंचांग ~🌞* *⛅दिनांक - 31 जुलाई 2026* *⛅दिन - शुक्रवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - दक्षिणायण* *⛅ऋतु - वर्षा* *⛅मास - श्रावण* *⛅पक्ष - कृष्ण* *⛅तिथि - द्वितीया रात्रि 10:31 तक तत्पश्चात् तृतीया* *⛅नक्षत्र - धनिष्ठा शाम 07:26 तक तत्पश्चात् शतभिषा* *⛅योग - सौभाग्य रात्रि 11:54 तक तत्पश्चात् शोभन* *⛅राहुकाल - सुबह 10:54 से दोपहर 12:33 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 05:57* *⛅सूर्यास्त - 07:09 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - पश्चिम दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:31 से प्रातः 05:14 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:07 से दोपहर 01:00 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:12 से मध्यरात्रि 12:55 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️विशेष - द्वितीया को बृहती (छोटा बैंगन या कटेहरी) खाना निषिद्ध है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* *✨ इन्द्राख्यानवर्णन 2, सर्ग 262 📜* *🔴 हे रामजी🙏! जब इन पदार्थों का कारण विचारिये तो कारण कोई नहीं निकलता, इसी से जाना जाता है कि आभासमात्र🪞 हैं बने कुछ नहीं और आत्मसत्ता✨ ही इस प्रकार हो भासती है | आत्मसत्ता अद्वैत और परमशुद्ध है उसमें जगत्🌍 कुछ बना नहीं तो मैं आकार क्या कहूँ और निराकार☁️ क्या कहूँ?* *🔴 पृथ्वी, जल💧, तेज🔥, वायु🌬️ और आकाश भी द्वैत कुछ नहीं शुद्ध आत्मसत्ता ही इस प्रकार हो भासती है | जैसे संकल्प के रचे पदार्थ होते हैं सो अनुभवरूप👁️ हैं, तैसे ही ये सब पदार्थ अनुभवरूप हैं-अनुभव से भिन्न कुछ नहीं | इस पर एक आख्यान कहता हूँ उसे मन🧠 लगाके सुनो |* *🔴 हे रामजी! आगे भी मैंने तुमसे कहा है और अब भी प्रसंग को पाकर कहता हूँ | एक समय एक सृष्टि में एक इन्द्र ब्राह्मण था जो मानो ब्रह्मा🪷 ही था | उसके गृह🏠 में दश पुत्र हुए जो मानो दशों दिशा थे | कुछ काल⏳ में वह ब्राह्मण मृतक💀 हुआ और उसकी स्त्री पतिव्रता थी इसलिये उसके प्राण भी छूट गये- जैसे दिन के पीछे संध्या आ जाती है |* *🔴 तब उन पुत्रों ने यथाशास्त्र📜 क्रम से उनकी क्रिया की और फिर एक पहाड़⛰️ की कन्दरा में जा स्थित हुए और विचारने लगे कि किसी प्रकार हम ऊँचे पद को पावें |* *🔴 हे रामजी! आगे मैंने तुमको सुनाया है कि प्रथम उन्होंने मण्डलेश्वर, चक्रवर्ती राजा👑 और इन्द्रादिक के पद को विचारा और फिर बड़े भाई ने निर्णय करके यही कहा कि सबसे ऊँचा ब्रह्माजी का पद है जिनकी यह सब सृष्टि रची हुई है इसलिये हम दशों ब्रह्मा होवें |* *🔴 ऐसे विचार करके वे दशों पद्मासन🧘♂️ बाँध के बैठे और यह निश्चय🎯 धारा कि हम चतुर्मुख ब्रह्मा हैं और सब सृष्टि हमारी रची है | निदान वे ऐसे हो गये मानो पुतलियाँ लिखी हुईं हैं और खान-पान से रहित मात्र, युग और वर्ष व्यतीत हो गये पर वे ज्यों के त्यों रहे चलायमान न हुए | जैसे जल नीचे ठौर में जाता है ऊँचे को नहीं जाता, तैसे ही उन्होंने अपना निश्चय न त्यागा और दृढ़ रहे |* *🔴 जब कुछ काल व्यतीत हुआ तब उनके शरीर💪 गिर पड़े और उनको पक्षी🐦 खा गये पर उनकी जो ब्रह्मा की वासना संयुक्त संवित् थी उस वासना से दशों ब्रह्मा हो गये और उनकी दश ही सृष्टि देश, काल, पदार्थ और नेति सहित हो गईं |* *🔴 जैसे हमारी सृष्टि है, तैसे ही वे सृष्टि क्या रूप हुईं और तो कुछ नहीं, कुछ और होवे तो कहूँ | इससे सृष्टि का और रूप कुछ नहीं अपना अनुभव ही सृष्टिरूप भासता है और जो कुछ पदार्थ भासते हैं सो सब आत्मरूप हैं |* *🔴 हे रामजी! जैसे हम ब्रह्मा के संकल्प💭 में रचे हैं तैसे ही उन्होंने भी रच लिये और वे भी इस प्रकार स्थित हो गये, इससे सर्वजगत् ब्रह्मस्वरूप🕉️ है | जो किसी कारण से जगत् बना होता तो जाना जाता कि कुछ हुआ है पर इसका कारण कोई नहीं पाया जाता इससे संकल्पमात्र और आभासमात्र है | इससे कहता हूँ कि ब्रह्म ही है और वस्तु कुछ नहीं | जो कुछ पदार्थ पाषाण🪨, वृक्ष🌳, जड़-चेतन भासते हैं, सो सब ब्रह्मस्वरूप हैं उससे भिन्न कुछ नहीं |* *🔴 हे रामजी! महाभूत जो वृक्ष, पृथ्वी, आकाश, पहाड़ हैं ये सब चिदाकाश से भिन्न कुछ नहीं जैसे इन्द्र के पुत्र एकसे अनेक हो गये, तैसे ही यह सृष्टि भी एक से अनेक है और प्रलय🌋 में अनेक से एक हो जाती है |* *🔴 जैसे एक तुम स्वप्ने💤 में अनेक हो जाते हो और सु
Comments (2)

Rama Devi Sahu
Jul 31, 2026
🌹🌹 Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🌹 Suprabhat Ji 🌹🌹

प्रेम कुमार
Jul 31, 2026
🌹🌹 जय श्री कृष्णा राधे राधे 🌹🌹 शुभ प्रभात वंदन बहना 🌹🌹
