
Rama Devi Sahu
6 hours ago
माता सीता के जीवन से जुड़ी एक अत्यंत प्रसिद्ध और अनोखी कथा गया (बिहार) में राजा दशरथ के पिंडदान और फल्गु नदी को मिले श्राप की है। यह कथा माता सीता के सत्य की शक्ति और उनके दृढ़ स्वभाव को दर्शाती है। यह प्रसंग रामायण के अयोध्या कांड और पुराणों में आता है: वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी अपने पिता राजा दशरथ का श्राद्ध और पिंडदान करने के लिए गयाजी पहुंचे। वहाँ पहुँच कर श्रीराम और लक्ष्मण पिंडदान की आवश्यक सामग्री (फल, फूल और अन्न) लेने के लिए नगर की ओर चले गए। माता सीता नदी के किनारे बैठकर उनके लौटने की प्रतीक्षा करने लगीं। सामग्री लाने में श्रीराम और लक्ष्मण को काफी देर हो गई। इसी बीच पिंडदान का शुभ मुहूर्त (समय) निकला जा रहा था। तभी अचानक राजा दशरथ की आत्मा प्रकट हुई। उन्होंने माता सीता से कहा कि उन्हें बहुत भूख लगी है और यदि मुहूर्त बीत गया, तो वे तृप्त नहीं हो पाएंगे। राजा दशरथ ने सीता जी से तुरंत पिंडदान करने का आग्रह किया। सामग्री न होने पर भी माता सीता विचलित नहीं हुईं। उन्होंने समय के महत्व को समझा और फल्गु नदी के किनारे की बालू (रेत) को हाथ में लेकर पिंड बनाए। उन्होंने वहाँ उपस्थित पांच गवाहों को साक्षी मानकर राजा दशरथ की आत्मा को पिंडदान कर दिया: * फल्गु नदी * एक गाय * एक ब्राह्मण * तुलसी का पौधा * एक वट वृक्ष (बरगद का पेड़) पिंडदान स्वीकार करते ही राजा दशरथ की आत्मा तृप्त हो गई और उन्होंने सीता जी को आशीर्वाद दिया। जब श्रीराम और लक्ष्मण सामग्री लेकर लौटे, तो माता सीता ने उन्हें पूरी बात बताई। श्रीराम को बिना सामग्री के पिंडदान की बात पर विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने सीता जी से प्रमाण माँगा। सीता जी ने अपने पांचों गवाहों से सच बताने को कहा। लेकिन, श्रीराम के क्रोध और दोबारा दान मिलने के लालच में आकर फल्गु नदी, गाय, ब्राह्मण और तुलसी ने झूठ बोल दिया कि माता सीता ने कोई पिंडदान नहीं किया है। केवल वट वृक्ष ने सत्य का साथ दिया और कहा कि माता सीता ने पूरी निष्ठा से रेत का पिंड देकर राजा दशरथ को तृप्त किया है। झूठ सुनकर माता सीता को अत्यंत क्रोध आ गया। उन्होंने सत्य को छुपाने वाले चारों गवाहों को जीवनभर के लिए श्राप दे दिया: फल्गु नदी को श्राप: तुम केवल नाम की नदी रहोगी, तुम्हारा पानी हमेशा जमीन के नीचे सूखे में बहेगा (आज भी फल्गु नदी ऊपर से सूखी दिखती है, पर रेत हटाने पर नीचे पानी मिलता है)। गाय को श्राप: पूजनीय होने के बाद भी तुम्हें लोगों का जूठा और गंदगी खानी पड़ेगी। तुलसी को श्राप: तुम कभी गया की मिट्टी में नहीं उगोगी। ब्राह्मण को श्राप: गया के ब्राह्मण कभी भी धन से संतुष्ट नहीं होंगे और हमेशा दरिद्रता महसूस करेंगे। वट वृक्ष को वरदान: सत्य का साथ देने के कारण सीता जी ने वट वृक्ष को आशीर्वाद दिया कि तुम हमेशा अमर रहोगे। तुम्हें 'अक्षयवट' कहा जाएगा और जो भी गया आकर तुम्हारी पूजा करेगा, उसके पितर हमेशा के लिए तृप्त हो जाएंगे।
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