
Haresh Chanchlani Chanchlani
331 days ago
“मैं हूँ न, ये सिर्फ तीन शब्द नहीं, एक भरोसा है।जब कोई टूट रहा होता है, तो उसे समाधान नहीं, सहारा चाहिए। वो चाहता है कि कोई साथ खड़ा हो, चाहे हालात कितने भी मुश्किल हों। ऐसे में आपका यह कहना कि “मैं हूँ न” उसके थके हुए मन में फिर से जीवन का संचार कर देता है।किसी के पास जाकर पास बैठ जाना अच्छा है,पर कभी-कभी कह देना भी जरूरी है ,घबराना मत, मैं आ गया हूँ…मैं हूँ न। ये शब्द दिल में हिम्मत जगाते हैं,और यही हिम्मत इंसान को आगे बढ़ा देती है।🌷

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