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*राम-लक्ष्मण द्वादशी* 🙏 *क्या है राम-लक्ष्मण द्वादशी?* ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की *द्वादशी तिथि* को "राम-लक्ष्मण द्वादशी" कहते हैं। इसे *चंपक द्वादशी* और *राम द्वादशी* भी कहा जाता है। *2026 में तारीख*: 27 मई 2026, बुधवार *क्यों खास है ये द्वादशी?* 1. *भगवान विष्णु + श्रीराम का दिन*: इस दिन भगवान विष्णु के राम अवतार और उनके छोटे भाई लक्ष्मण जी की पूजा का विशेष महत्व है। 2. *भ्रातृ प्रेम का प्रतीक*: राम-लक्ष्मण जैसा भाईचारा, त्याग और प्रेम पाने के लिए ये व्रत रखा जाता है। 3. *चंपक पुष्प का महत्व*: इस दिन भगवान विष्णु को चंपा के फूल चढ़ाने से सभी मनोकामना पूरी होती है। इसलिए इसे चंपक द्वादशी भी कहते हैं। *व्रत कथा संक्षेप में* त्रेता युग में जब भगवान राम और लक्ष्मण वनवास में थे, तब लक्ष्मण जी ने ज्येष्ठ शुक्ल द्वादशी को पूरे दिन बिना अन्न-जल के राम जी की सेवा की थी। उनकी इस निष्ठा से प्रसन्न होकर विष्णु जी ने वरदान दिया कि जो भी इस दिन राम-लक्ष्मण का व्रत-पूजन करेगा, उसके भाईयों में प्रेम बढ़ेगा और परिवार में कलह खत्म होगी। *पूजा विधि* 1. *सुबह*: जल्दी उठकर स्नान करें। पीले वस्त्र पहनें। 2. *संकल्प*: व्रत का संकल्प लें। दिनभर फलाहार करें या निर्जल व्रत रखें। 3. *पूजा*: विष्णु जी/राम दरबार की फोटो के सामने घी का दीपक जलाएं। चंपा के फूल, तुलसी, पीले फल, खीर का भोग लगाएं। 4. *मंत्र*: "ॐ राम रामाय नमः" + "ॐ लक्ष्मणाय नमः" का 108 बार जाप करें। राम रक्षा स्तोत्र पढ़ें। 5. *कथा*: राम-लक्ष्मण द्वादशी की कथा सुनें। 6. *दान*: अगले दिन द्वादशी पारण पर ब्राह्मण/जरूरतमंद को भोजन, पीले वस्त्र, चंपा का इत्र दान करें। *क्या लाभ मिलते हैं?* **इच्छा** **लाभ** **भाई-बहन में झगड़ा** आपसी प्रेम बढ़ता है, मनमुटाव खत्म होता है **संतान सुख** निःसंतान को राम जी जैसी संतान का आशीर्वाद **परिवार में शांति** घर की कलह, रोग, दोष दूर होते हैं **आज्ञाकारी संतान** लक्ष्मण जैसी सेवा भाव वाली संतान होती है **विष्णु कृपा** सभी 24 एकादशी के बराबर फल मिलता है *जरूरी नियम* 1. इस दिन *चावल, बैंगन, मसूर दाल* न खाएं। 2. झूठ, क्रोध, लड़ाई से बचें। खासकर भाई से नहीं लड़ें। 3. दिन में न सोएं। भजन-कीर्तन करें। *27 मई 2026 का शुभ मुहूर्त*: - *पूजा मुहूर्त*: सुबह 7:15 से 8:50 AM - *द्वादशी तिथि*: 26 मई रात 11:49 PM से 27 मई रात 9:39 PM तक - *पारण समय*: 28 मई सुबह 5:45 AM के बाद अगर घर में भाई-भाई में अनबन है या संतान कहना नहीं मानती, तो ये व्रत जरूर करें। राम जी और लक्ष्मण जी जैसा प्रेम घर में आता है।

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