
Rama Devi Sahu
17 days ago
माता लक्ष्मी की कथा: दरिद्रता का नाश और श्री प्राप्ति की कथा प्राचीनकाल की बात है, एक नगर में एक बहुत ही गरीब ब्राह्मण रहता था। वह ब्राह्मण नियमित रूप से भगवान विष्णु की पूजा-पाठ करता था और अत्यंत परोपकारी व धर्मनिष्ठ था। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर एक दिन स्वयं जगत के पालनहार भगवान विष्णु ने उसे दर्शन दिए और उसकी गरीबी दूर करने का एक उपाय बताया। भगवान विष्णु ने ब्राह्मण को बताया कि नगर के मुख्य मार्ग पर रोज सुबह एक स्त्री आती है, जो माता लक्ष्मी का ही रूप है। वही स्त्री घरों में सुख-समृद्धि और धन लाती है। भगवान ने ब्राह्मण को सलाह दी कि जब वह स्त्री उसके घर आए, तो वह उसके चरणों में गिर जाए और उसे अपने घर में रुकने का अनुरोध करे। अगले दिन सुबह, ब्राह्मण उस मार्ग पर बैठ गया। जैसे ही वह दिव्य स्त्री उसके घर की ओर आने लगी, ब्राह्मण तुरंत उनके चरणों में गिर गया और करबद्ध होकर अपने घर पधारने की प्रार्थना करने लगा। माता लक्ष्मी (उस स्त्री) समझ गईं कि यह सब भगवान विष्णु के संकेत से हुआ है। उन्होंने ब्राह्मण से कहा, "हे ब्राह्मण! तुम व्रत और पूजन करते हो, लेकिन तुम्हारे घर में माता लक्ष्मी के स्थायी वास के लिए पवित्रता और सेवा-भाव की जो कमी है, उसे दूर करो। यदि तुम सच्चे मन से मेरा स्वागत करोगे, तो मैं तुम्हारे घर को धन-धान्य से भर दूँगी।" इसके बाद ब्राह्मण और उसकी पत्नी ने माता लक्ष्मी के बताए अनुसार विधि-विधान से व्रत और पूजन किया। उनके घर की दरिद्रता हमेशा के लिए दूर हो गई और उनके जीवन में सुख, वैभव और ऐश्वर्य का आगमन हुआ। इस कथा का संदेश: यह कथा हमें सिखाती है कि केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि जीवन में अनुशासन, सच्ची श्रद्धा और पवित्रता होने पर ही माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

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