
Lal Singh 🇮🇳🇮🇳
6 hours ago
25.8.2026 यात्राएं दो प्रकार की होती हैं। एक इस संसार में जीवित रहते हुए यात्रा। और दूसरी जीवन यात्रा। पहली यात्रा तो रेल बस कार आदि से सब लोग करते ही है। *"उसमें यात्री को पता होता है कि मुझे कहां जाना है और मेरे जाने का रास्ता कौन सा है? उसका नक्शा पहले से बना हुआ होता है। उस नक्शे पर वह चलता रहता है, तथा अपने लक्ष्य पर पहुंच जाता है।"* परंतु जो जीवन की यात्रा है, जो हमें अपने अंतिम लक्ष्य तक ले जाती है। *"उसका कुछ हिस्सा इसी जीवन में जीते जी पार करना होता है, और बची हुई यात्रा अगले जन्म में। इस जीवन यात्रा का अंतिम लक्ष्य मोक्ष है।"* *"यदि एक दृष्टि से देखें, तो इस जीवन यात्रा में नक्शा पहले से निर्धारित नहीं होता। प्रायः किसी को पता नहीं होता, कि जीवन जीते हुए उसकी परिस्थितियां उसे कब कहां ले जाएंगी?" "इस जीवन यात्रा में जो व्यक्ति ईमानदारी तथा बुद्धिमत्ता से निर्णय लेता है, और लक्ष्य की ओर बढ़ने में पूरी मेहनत करता है, तो वह अपने रास्ते स्वयं बना लेता है, तथा अपने अंतिम लक्ष्य को प्राप्त कर लेता है। उसका जीवन सफल हो जाता है।"* *"आप भी अपने लक्ष्य को पहचानें और स्वयं अपना रास्ता बनाएं। यदि स्वयं न बना पाएं, तो आध्यात्मिक सच्चे वैदिक विद्वानों का सहयोग लें। वे आपको ठीक लक्ष्य की ओर ले जाएंगे। उनके निर्देश पर गहराई से चिंतन करें, तो आप अपना मार्ग भी स्वयं बना लेंगे, तथा धीरे-धीरे लक्ष्य पर भी पहुंच जाएंगे।"* ---- *"स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक - दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात."*

Comments (1)

सविता
Aug 25, 2026
RADHE RADHE 🙏🌹