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Rama Devi Sahu

236 days ago

संकष्ट चतुर्थी क्यों मनाई जाती है? भगवान श्री गणेश अपने वाहन मूषक पर सवार होकर रात्रि में भ्रमण कर रहे थे। मार्ग में मूषक फिसल गया और गणेश जी गिर पड़े। यह दृश्य देखकर चंद्रदेव हँस पड़े। गणेश जी ने इसे केवल हँसी नहीं, बल्कि अहंकार और उपहास माना। क्रोधित होकर गणेश जी बोले— “हे चंद्र! आज से जो कोई तुम्हें देखेगा, उसे कलंक और अपमान का सामना करना पड़ेगा।” यह सुनकर चंद्रदेव भयभीत हो गए और गणेश जी के चरणों में गिरकर क्षमा माँगने लगे। चंद्रदेव की विनती सुनकर गणेश जी का हृदय पिघल गया। उन्होंने कहा— “श्राप वापस नहीं लिया जा सकता, परंतु उसमें सुधार किया जा सकता है।” तब गणेश जी ने वरदान दिया— यदि कोई भक्त चतुर्थी के दिन दिन भर व्रत रखे और रात में चंद्रमा के दर्शन कर मेरा पूजन करे, तो चंद्र दर्शन से होने वाला दोष नष्ट हो जाएगा। यही कारण है कि चतुर्थी को चंद्र दर्शन से पहले व्रत और पूजन का विधान है। इसी दिन को कहा गया — 🌺 संकष्ट चतुर्थी 🌺 अर्थात संकट को हरने वाली तिथि।

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