
Rama Devi Sahu
255 days ago
प्रेम के आगे फीके पड़े कर्मों के लेख] क्या कर्मों का विधान अटूट है? क्या भाग्य में लिखा बदला नहीं जा सकता? जब भगवान श्रीकृष्ण ने अपने परम मित्र सुदामा जी की दरिद्रता देखकर उन्हें तीनों लोकों का स्वामी बना दिया, तो यह देखकर धर्मराज यमराज का धैर्य जवाब दे गया। वे विधि के विधान का उल्लंघन होते देख सीधे द्वारिकाधीश के पास जा पहुंचे। यमराज ने अपने बहीखाते प्रभु के सामने रखते हुए कहा, "क्षमा करें भगवन! परंतु लगता है यमपुरी में अब मेरी आवश्यकता नहीं रही। आपने सुदामा को तीनों लोकों की संपत्ति देकर विधि के बनाए विधान को ही पलट दिया है। उसके प्रारब्ध में तो आजीवन दरिद्रता लिखी थी। यदि आप ही कर्मों के लेख मिटा देंगे, तो कर्म की प्रधानता का क्या होगा?" भगवान श्रीकृष्ण मंद-मंद मुस्कुराए और बोले, "यम, तनिक अपना बहीखाता फिर से तो देखो।" यमराज ने जब सुदामा जी का भाग्य-स्थान पुनः देखा तो उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं! वहां जहां विधाता ने 'श्रीक्षय' (सम्पत्ति का नाश) लिखा था, वहां स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने उन अक्षरों को उलटकर 'यक्षश्री' (कुबेर की संपत्ति) लिख दिया था। चकित यमराज को देख प्रभु बोले, "यमराज जी! आप केवल कर्म देखते हैं, मैं 'भाव' देखता हूँ। क्या आप जानते हैं कि सुदामा ने मुझे क्या अर्पण किया था? उसने मुझे अपना सर्वस्व अर्पण किया था। वह मुट्ठी भर चावल उसकी कुल पूंजी थी, जो उसने बड़े ही प्रेम और संकोच से मुझे खिलाई। और जो मुझे प्रेम से कुछ खिलाता है, उसे सम्पूर्ण विश्व को भोजन कराने जितना पुण्य प्राप्त होता है। मैंने तो सुदामा को केवल उसके उसी निश्छल प्रेम का प्रतिफल दिया है।" सार: प्रभु के लिए भक्त का प्रेम ही सर्वोपरि है। जहाँ सच्चा प्रेम और समर्पण होता है, वहाँ कर्मों के कठोर नियम भी शिथिल पड़ जाते हैं। प्रेम से बोलिए... राधे-राधे! 🙏❤ #KrishnaSudama #

Comments (4)

Rama Devi Sahu
Dec 17, 2025
🙏🏵️🌿 Radhe Radhe 🙏 Jai Shree Krishna 🙏🏵️🌿

Rama Devi Sahu
Dec 17, 2025
Ji Shukriya 🌹

Sanju ❤️
Dec 17, 2025
jai Shri radhe 👏

Sanju ❤️
Dec 17, 2025
right 👍
