
Rama Devi Sahu
463 days ago
🙏‼️ Jai Shree Krishna ‼️🙏 जब द्रौपदी के पांचों लड़के महाभारत के युद्ध में मारे दिए गए, तब उनको समझ में आया कि युद्ध क्या होता है। उसके पहले वह युद्ध के लिए सबसे अधिक लालायती थीं, सबसे अधिक युद्ध के लिए पांडवों को ललकारती थीं- कृष्ण के युद्ध रोकने के हर प्रयास का सबसे अधिक विरोध द्रौपदी करती थीं। महाभारत युद्ध को हर कीमत पर रोकने के लिए कृष्ण सभी तरह का प्रयास कर रहे थे, जो लोग कृष्ण के युद्ध रोकने के प्रयासों का सबसे अधिक विरोध कर रहे थे, उसमें द्रौपदी पहले नंबर थीं। जब युद्ध रोकने या समझौते की कोई बात शुरू होती, वह कहती कि मेरे इन खुले बालों का क्या होगा? जो दुशासन के रक्त के प्यासे हैं, वह कहती भीम की उस प्रतिज्ञा का क्या होगा, जो उन्होंने दुर्योधन की जंघा तोड़ने के लिए लिया है। उस कर्ण को मैं जीवित कैसे देख सकती हूं, जिसने मुझे वेश्या कहा। कृष्ण हर बार उन्हें डांटते हुए कहते कि तुम्हारे खुले बालों , तुम्हारे बदले की भावना , दुशासन के रक्त, तुम्हारे मन की शांति के लिए दुर्योधन के टूटी जंघा और कर्ण की हत्या तक युद्ध सीमित नहीं है। अगर यह युद्ध हुआ, तो लाखों निर्दोष लोग मारे जाएंगे, लाखों बच्चे अनाथ होंगे, लाखों महिलाएं विधवा और लाखों मांओं की गोद सूनी हो जाएगी। युद्ध में मारे जाने वाले और अपने को खोने वाले वे लोग होंगे, जिनका कुछ भी इस युद्ध में दांव नहीं लगा है। चाहे वे पांडव की सेना में हों या कौरव की सेना में उनका कोई हित-अहित या लाभ-हानि इस युद्ध से नहीं जुड़ा हुआ है। वे सिर्फ सैनिक के तौर पर अपनी रोजी-रोटी या वफादारी साबित करने के लिए इस या उस पक्ष में युद्ध में शामिल होंगे। मुझे तुम्हारे निजी बदले की भावना की नहीं, उन लोगों की चिंता है, बिना किसी वजह के इसमें मारे जाएंगे। कृष्ण के सारे प्रयास असफल हुए और महाभारत का युद्ध हुआ। लाखों लोग मारे गए। युद्ध के अंतिम दौर में द्रौपदी के पांचों लड़के एक साथ मारे गए। सुभद्रा का लड़का अभिमन्यु पहले ही मारा जा चुका था। जब अपने पांचों बच्चों के मारे जाने पर द्रौपदी विलखने लगीं, हाय-तौबा मचान लगीं तो, कृष्ण ने दो टूक कहा, तुम तो हर हालात में युद्ध चाहती थी, युद्ध रोकने के हर प्रयास का सबसे अधिक विरोध कर रही थी, हर तरह से शांति की किसी भी कोशिश के खिलाफ थी। अब क्यों विलख रही हो, क्यों हाय तौबा मचा रही हो, तुम क्या सोचती थी कि युद्ध में दूसरों के बेटे मारे जाएंगे और तुम युद्ध का तमाशा देखोगी, तुम्हें नहीं कुछ खोना पड़ेगा। तुम्हारे बच्चे से तुम्हारे बदले की मानसिकता की बलि चढ़े, इसके बाद भी तुम्हे राज मिलेगा, शासन मिलेगा। तुम पटरानी बनोगी। उनके के बारे में भी तनिक विचार करो, जिन्होंने अपने बेटों, पतियों, भाईयों और पिता को अकारण खो दिया, जिन्हें इस युद्ध से कुछ नहीं मिला। जिनका इस युद्ध से कोई लेना-देना नहीं था । युद्ध के लिए ललकारने वालों को तब तक युद्ध की कीमत नहीं पता चलती, जबतक कि इस युद्ध की बलिवेदी पर उनके अपने नहीं चढ़ते हैं, द्रौपदी की तरह। राष्ट्रवादी युद्ध अंतिम विकल्प होना चाहिए और एक सीमित उद्देश्य के लिए होना चाहिए और जब उद्देश्य की प्राप्ति हो जाये तो सम्मानजनक समझौता करके युद्ध से बाहर निकल आना चाहिए। इसलिए मोदी ने जो सीज फायर किया वह एक सुलझा हुआ निर्णय था। जो लोग सीज फायर का विरोध कर रहे है उनका कोई बच्चा फौज में लड़ाई में नहीं है।
Comments (3)

Renu sharma
May 25, 2025
radhe radhe

Anup Kumar Sinha
May 25, 2025
जय श्री कृष्ण 🙏🙏

ILA SINHA
May 25, 2025
Jai Shree Krishna 🙏
