
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
159 days ago
*खौफ का दरवाज़ा* गाँव के बाहर सदियों पुराना एक विशाल लोहे का दरवाज़ा था। किंवदंती थी कि उस पार अपार सफलता है, लेकिन जो भी उस दरवाज़े के खौफनाक पहरेदारों का सामना करने गया, वो डर के मारे लौट आया। सालों तक किसी ने हिम्मत नहीं की। एक रात, कबीर उस दरवाज़े के सामने जा खड़ा हुआ। अचानक हवाएँ चीखने लगीं और डरावनी परछाइयां उसे डराने लगीं। ये परछाइयां कुछ और नहीं, उसके अपने ही दिमाग के डर, असफलता का खौफ और असुरक्षाएं थीं। कबीर ने आँखें बंद कीं, अपने डर को स्वीकार किया और बिना पीछे हटे दरवाज़े को पूरी ताकत से धक्का दे दिया। परछाइयां चीखते हुए धुएं में बदल गई। दरवाज़े के उस पार एक नई, सुनहरी दुनिया उसका इंतज़ार कर रही थी। कबीर ने दिखा दिया कि हमारी सबसे बड़ी कामयाबी अक्सर हमारे सबसे गहरे खौफ के दरवाज़े ठीक पीछे छिपी होती है।
Comments (2)

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Mar 25, 2026
ॐ ह्रीं स्त्रीं हूं फट्🙏

neeraj
Mar 25, 2026
जय माँ तारा
