
Rama Devi Sahu
38 days ago
कुछ कथाएं ऐसी होती हैं जिन्हें सुनकर विश्वास और भी गहरा हो जाता है। कहते हैं कि जब कोई भक्त पूरी श्रद्धा से भगवान विष्णु को पुकारता है, तब वे किसी न किसी रूप में उसकी रक्षा करने अवश्य आते हैं। ऐसी ही एक अद्भुत कथा एक रहस्यमयी नाविक की है, जिसे आज भी कई भक्त भगवान विष्णु की लीला मानते हैं। बहुत समय पहले एक वृद्ध विष्णु भक्त अपने परिवार और कुछ यात्रियों के साथ एक प्रसिद्ध तीर्थ की यात्रा पर निकला। कई दिनों की कठिन यात्रा के बाद उन्हें एक विशाल और उफनती हुई नदी पार करनी थी। उस समय नदी पर कोई पुल नहीं था। यात्रियों को पार ले जाने के लिए केवल छोटी-छोटी लकड़ी की नावें ही उपलब्ध थीं। नदी के किनारे पहुंचकर कुछ लोगों ने कहा, "आज नदी का प्रवाह बहुत तेज है। थोड़ा इंतजार कर लेते हैं।" लेकिन तभी एक नाविक वहां आया और बोला, "घबराइए मत। मैं आप सभी को सुरक्षित पार पहुंचा दूंगा।" उसका चेहरा तेजस्वी था, आंखों में अद्भुत शांति थी और उसके मुख पर हमेशा एक हल्की मुस्कान बनी हुई थी। वृद्ध भक्त ने मन ही मन भगवान विष्णु का स्मरण किया और सभी लोग नाव में बैठ गए। शुरुआत में यात्रा बिल्कुल सामान्य रही। नाव धीरे-धीरे आगे बढ़ती रही। लेकिन जैसे ही वह नदी के बीचों-बीच पहुंची, अचानक मौसम बदल गया। तेज आंधी चलने लगी। काले बादल छा गए। बिजली चमकने लगी और नदी की लहरें विकराल रूप धारण करने लगीं। कुछ ही क्षणों में नाव बुरी तरह हिलने लगी। यात्रियों में चीख-पुकार मच गई। किसी ने भगवान को पुकारा, कोई रोने लगा, तो कोई अपने परिवार को गले लगाकर बैठ गया। इसी बीच नाव एक विशाल चट्टान के पास जाकर फंस गई। लहरें इतनी प्रचंड थीं कि किसी भी क्षण नाव पलट सकती थी। सभी लोगों को लगने लगा कि अब उनका बचना असंभव है। लेकिन वह रहस्यमयी नाविक बिल्कुल शांत खड़ा रहा। उसके चेहरे पर भय का कोई चिन्ह नहीं था। वृद्ध भक्त ने कांपते हुए हाथ जोड़कर कहा, "हे नारायण! यदि हमने जीवन भर आपकी सच्चे मन से भक्ति की है, तो आज हमारी रक्षा कीजिए।" उनकी आंखों से आंसू बहने लगे और वे लगातार "ॐ नमो नारायणाय" का जाप करने लगे। धीरे-धीरे नाव में बैठे सभी लोग भी भगवान विष्णु का नाम लेने लगे। कुछ ही क्षणों में पूरी नाव हरिनाम से गूंज उठी। तभी वह नाविक मुस्कुराया और बोला, "डरिए मत। जहां विश्वास होता है, वहां भगवान स्वयं मार्ग बना देते हैं।" इतना कहकर उसने नाव की पतवार संभाली। आश्चर्य की बात यह थी कि जहां कुछ देर पहले प्रचंड लहरें उठ रही थीं, वहीं अचानक नदी का एक संकरा लेकिन शांत रास्ता दिखाई देने लगा। नाव धीरे-धीरे उसी दिशा में बढ़ने लगी। कुछ ही मिनटों में वह भयंकर धारा को पार करती हुई सुरक्षित किनारे पहुंच गई। किनारे पर पहुंचते ही सभी यात्रियों ने राहत की सांस ली। वे उस नाविक का धन्यवाद करने के लिए मुड़े, लेकिन वहां कोई नहीं था। नाव भी गायब थी और नाविक भी। ऐसा लग रहा था मानो वह कभी वहां था ही नहीं। चारों ओर केवल शांत नदी और मंद-मंद बहती हवा थी। वृद्ध भक्त की दृष्टि तभी पास के रेत पर पड़ी। वहां शंख और चक्र जैसे दो दिव्य चिन्ह बने हुए थे। उन्हें देखते ही उनका हृदय भर आया। वे भूमि पर दंडवत होकर रो पड़े और बोले, "प्रभु! आप स्वयं हमारी रक्षा करने आए थे और हम आपको पहचान भी न सके।" उसी समय वहां उपस्थित एक वृद्ध संत ने कहा, "भगवान विष्णु अपने भक्तों को कभी अकेला नहीं छोड़ते। जब संकट बहुत बड़ा होता है, तब वे किसी साधारण मनुष्य, किसी यात्री, किसी मित्र या किसी नाविक का रूप धारण करके भी अपने भक्तों की रक्षा कर लेते हैं।" कहते हैं कि उस दिन के बाद से उस नदी के किनारे एक छोटा सा विष्णु मंदिर बनवाया गया। वहां आने वाले यात्री यात्रा शुरू करने से पहले भगवान विष्णु का स्मरण करते और सुरक्षित यात्रा की प्रार्थना करते। आज भी अनेक श्रद्धालु विश्वास करते हैं कि सच्ची भक्ति और अटूट विश्वास के साथ लिया गया भगवान विष्णु का नाम सबसे बड़े संकट से भी पार लगा सकता है। ॥ ॐ नमो नारायणाय ॥ ॥ जय श्रीहरि विष्णु ॥
Comments (1)

Shah 🩷
Jul 23, 2026
*🪷 जय श्री राधे कृष्ण 🪷आप स्वस्थ रहें प्रसन्न रहें🌹👌👌
