
प्रभा त्रिपाठी
446 days ago
महाभारत–सार 🚩 य इमां संहितां पुण्यां पुत्रमध्यापयच्छुकम्। मातापितृसहस्त्राणि पुत्रदारशतानि च। संसारेष्वनुभूतानि यान्ति यास्यन्ति चापरे॥६०॥ जिन भगवान् वेदव्यासने इस पवित्र संहिताको प्रकट करके आपने पुत्र शुकदेवजीको पढ़ाया था (वे महाभारतके सारभूत उपदेशका इस प्रकार वर्णन करते हैं–) “मनुष्य इस जगत्में हजारों माता-पिताओं तथा सैकड़ों स्त्री-पुत्रोंके संयोग-वियोगका अनुभव कर चुके हैं, करते हैं और करते रहेंगे”॥६०॥ हर्षस्थानसहस्त्राणि भयस्थानशतानि च। दिवसे दिवसे मूढमाविशन्ति न पण्डितम्॥६१॥ “अज्ञानी पुरुषको प्रतिदिन हर्षके हजारों और भयके सैकड़ों अवसर प्राप्त होते रहते हैं; किंतु विद्वान् पुरुषके मनपर उनका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है”॥६१॥ ऊर्ध्वबाहुर्विरौम्येष न च कश्चित् श्रृणोति मे। धर्मादर्थश्च कामश्च स किमर्थं न सेव्यते॥६२॥ “मैं दोनों हाथ ऊपर उठाकर पुकार-पुकारकर कह रहा हूँ, पर मेरी बात कोई नहीं सुनता। धर्मसे मोक्ष तो सिद्ध होता ही है; अर्थ और काम भी सिद्ध होते हैं, तो भी लोग उसका सेवन क्यों नहीं करते”॥६२॥ न जातु कामान्न भयान्न लोभाद् धर्मं त्यजेज्जीवितस्यापि हेतोः। नित्यो धर्मः सुखदुःखे त्वनित्ये जीवो नित्यो हेतुरस्य त्वनित्यः॥६३॥ “कामनासे, भयसे, लोभसे अथवा प्राण बचानेके लिये भी धर्मका त्याग न करे। धर्म नित्य है और सुखदुःख अनित्य। इसी प्रकार जीवात्मा नित्य है और उसके बन्धनका हेतु अनित्य”॥ ६३॥ इमां भारतसावित्रीं प्रातरुत्थाय यः पठेत्। स भारतफलं प्राप्य परं ब्रह्माधिगच्छति॥६४॥ यह महाभारतका सारभूत उपदेश 'भारत-सावित्री' के नामसे प्रसिद्ध है। जो प्रतिदिन सबेरे उठकर इसका पाठ करता है वह सम्पूर्ण महाभारतके अध्ययनका फल पाकर परब्रह्म परमात्माको प्राप्त कर लेता है॥६४॥ – श्रीमन्महाभारत, स्वर्गारोहणपर्व (१८), ५.६०-६४ (गीताप्रेस-गोरखपुर-संस्करण) 🙏🚩🙏
Comments (3)

Deepak karki
Jun 11, 2025
Jai shree krishna radhe radhe ji

Rama Devi Sahu
Jun 11, 2025
Jai Shree Krishna 🙏🌹🌹

प्रेम कुमार
Jun 11, 2025
🙏🙏 शुभ प्रभात वंदन आप का दिन मंगलमय हो 🙏🙏
