MyMandirInstall

*हिंदी अनुवाद:* तंत्र ग्रंथों में मंत्र-रचना के वर्णन के अनुसार, मंत्र में _वह्नि_ (अग्नि) शब्द हस्तिपिशाची को चौथी महामात्रा के रूप में पहचान कराता है — कुब्जिकामत तंत्र के अनुसार यह सर्वोच्च कोटि की दिव्य स्त्री-शक्तियों का वर्ग है जो अग्नि-ऊर्जा धारण करती हैं। इस संदर्भ में पिशाचियाँ निम्न कोटि के प्राणी नहीं, बल्कि _देवयोनयः_ हैं — स्वयं देवताओं से उत्पन्न हुई हैं। इस युग्म (हस्ती + पिशाची) का आवाहन स्थिर और गतिशील पराचेतना का तांत्रिक मिलन है — साधना के मूल में स्थित शिव-शक्ति-ऐक्य।

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!