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ओम् देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः॥ सर्व पितृ अमावस्या के अवसर पर अपने सभी पूर्वजों को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उन्हे कोटि-कोटि नमन । आपका आशीष हम सभी पर सदैव ही बना रहे , यही प्रार्थना है ।

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