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🌙🦚 भाद्रपद की अष्टमी की वह दिव्य रात — जब कान्हा ने यमुना पार की 🪷🙏 ✨मथुरा नगरी में उस रात अंधकार छाया हुआ था। आकाश में काले बादल गरज रहे थे, चारों ओर तेज वर्षा हो रही थी और यमुना नदी उफान पर थी। यह कोई साधारण रात नहीं थी—भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र की पावन घड़ी में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी माता के गर्भ से अवतार लिया था। ✨कंस के अत्याचार से धरती कराह रही थी। आकाशवाणी हो चुकी थी कि देवकी का आठवाँ पुत्र ही कंस के विनाश का कारण बनेगा। इसलिए कंस ने देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया था। लेकिन जब आधी रात हुई, तब कारागार में अचानक दिव्य प्रकाश फैल गया। देवकी की गोद में स्वयं नारायण ने बालकृष्ण के रूप में जन्म लिया। ✨भगवान ने वसुदेव से कहा कि वे उन्हें तुरंत गोकुल ले जाएँ और वहाँ नंद बाबा के घर जन्मी कन्या को लेकर वापस लौट आएँ। ✨उसी क्षण कारागार के सभी द्वार अपने आप खुल गए और पहरेदार गहरी निद्रा में सो गए। वसुदेव ने नन्हे कान्हा को एक टोकरी में रखा और उसे अपने सिर पर उठाकर मथुरा से निकल पड़े।😮 ✨बाहर भयंकर वर्षा हो रही थी। वसुदेव के चारों ओर यमुना की लहरें गरज रही थीं। वे धीरे-धीरे नदी में आगे बढ़ने लगे। जैसे-जैसे जल ऊपर उठता गया, वसुदेव का हृदय चिंता से भरने लगा। तभी भगवान श्रीकृष्ण की लीला प्रकट हुई।🙏🏻🤔 ✨शेषनाग ने अपने विशाल फनों को फैलाकर बालकृष्ण के ऊपर छत्र बना दिया। वर्षा की बूंदें कान्हा को स्पर्श न कर सकीं। यमुना भी अपने आराध्य प्रभु के चरणों को छूने के लिए ऊपर उठी, लेकिन जैसे ही श्रीकृष्ण ने अपने नन्हे चरण जल की ओर बढ़ाए, यमुना शांत हो गई।🙏🏻😮 ✨वसुदेव सुरक्षित रूप से गोकुल पहुँचे। वहाँ नंद भवन में माता यशोदा के पास नवजात कन्या थी। वसुदेव ने कृष्ण को उनके पास सुला दिया और कन्या को लेकर मथुरा लौट आए। ✨सुबह होते ही गोकुल में आनंद छा गया—“नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की!” ✨उस रात जन्मे बालक केवल यशोदा के लाला नहीं थे, वे धर्म की रक्षा करने वाले, प्रेम का संदेश देने वाले और अधर्म का अंत करने वाले श्रीकृष्ण कन्हैया लाल थे।😮 ✨आज भी जन्माष्टमी की रात भक्त जब कृष्ण जन्म का उत्सव मनाते हैं, तो उस दिव्य दृश्य को याद करते हैं—सिर पर टोकरी में नन्हे कान्हा, चारों ओर उमड़ती यमुना, ऊपर शेषनाग की छाया और आकाश में चमकता चंद्रमा।🌿🙏🏻 जय श्री कृष्ण! 🦚🙏 जय कन्हैया लाल की! 🌺

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