View Lal Singh 🇮🇳🇮🇳's profile

हर हर महादेव 🙏 महादेव के ऐसे 4 परम भक्तों की कथा है, जिन्हें दर्शन देने के लिए भोलेनाथ स्वयं धरती पर आए थे। 1. नंदी जी - महादेव के द्वारपाल और वाहन नंदी जी सिर्फ एक बैल नहीं, महादेव के सबसे प्रिय गण हैं। कथा है कि शिलाद ऋषि को संतान नहीं थी, उन्होंने महादेव की कठोर तपस्या की। तब महादेव ने स्वयं उनके पुत्र के रूप में जन्म लेने का वरदान दिया। यज्ञ की भूमि से एक दिव्य बालक प्रकट हुआ - नंदी। नंदी जी बचपन से ही शिव भक्ति में लीन रहते थे। उन्होंने हजारों वर्ष तक शिव की तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें दो वरदान दिए - *पहला -* तुम सदा मेरे वाहन के रूप में मेरे साथ रहोगे। *दूसरा -* तुम मेरे कैलाश के द्वारपाल बनोगे, तुम्हारी आज्ञा के बिना कोई भी मुझ तक नहीं पहुँच सकेगा। इसीलिए आज भी हर शिव मंदिर में सबसे पहले नंदी जी की मूर्ति होती है, और भक्त अपनी प्रार्थना नंदी के कान में कहते हैं ताकि वो महादेव तक पहुँच जाए। 2. मार्कण्डेय ऋषि - जिन्होंने मृत्यु को भी हरा दिया मार्कण्डेय ऋषि, मृकण्डु ऋषि के पुत्र थे। उनके पिता को वरदान मिला था कि उन्हें एक 16 वर्ष तक जीने वाला ज्ञानी पुत्र होगा, या 100 वर्ष जीने वाला मूर्ख पुत्र। पिता ने ज्ञानी पुत्र को चुना। मार्कण्डेय जी 16 वर्ष के हुए तो उनके प्राण लेने स्वयं यमराज आए। उस समय मार्कण्डेय जी शिवलिंग को गले लगाकर *"महामृत्युंजय मंत्र"* का जाप कर रहे थे। यमराज ने जैसे ही अपना पाश फेंका, वह शिवलिंग पर जा गिरा। यह देखकर महादेव स्वयं शिवलिंग से प्रकट हो गए और यमराज को रोक दिया। उन्होंने कहा - जो मेरा भक्त है, उस पर काल का भी अधिकार नहीं। और फिर महादेव ने मार्कण्डेय जी को *अमरता का वरदान* दिया और सदा के लिए 16 वर्ष का ही रहने का आशीर्वाद दिया। इसी लिए उन्हें चिरंजीवी भी कहा जाता है। 3. राजा बाणासुर - हजार भुजाओं वाला परम शिवभक्त बाणासुर, राजा बलि का पुत्र और प्रह्लाद का वंशज था। वह शोणितपुर का राजा था। बाणासुर ने महादेव को प्रसन्न करने के लिए अपने हजार हाथों से हजारों वर्षों तक शिवलिंग पर रोज 1000 मुख वाले वाद्य यंत्र बजाए और कठोर तप किया। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर महादेव उसके नगर के रक्षक बन गए। महादेव के आशीर्वाद से ही उसे हजार भुजाएँ मिली थीं और इतनी शक्ति मिली थी कि वह पूरे त्रिलोक में अजेय हो गया था। उसे अपने बल पर इतना घमंड हो गया था कि वह युद्ध के लिए तरसता था। इसी घमंड को तोड़ने के लिए बाद में श्रीकृष्ण से उसका युद्ध हुआ, तब स्वयं महादेव को अपने भक्त बाणासुर के लिए श्रीकृष्ण से लड़ना पड़ा था। 4. ऋषि उपमन्यु - जिन्हें क्षीर-सागर मिला उपमन्यु बचपन में बहुत गरीब थे। एक बार उन्होंने अपने मामा के घर खीर खाई, उन्हें वह इतनी स्वादिष्ट लगी कि उन्होंने अपनी माँ से खीर माँगी। गरीब माँ ने पानी में आटा घोलकर उन्हें खीर कहकर पिला दिया। पर उपमन्यु समझ गए और उन्होंने ठान लिया कि वे शिव जी से क्षीर-सागर (दूध का सागर) प्राप्त करके ही रहेंगे। छोटे से बालक उपमन्यु ने जंगल में जाकर "ॐ नमः शिवाय" का अखंड जाप शुरू कर दिया। कई महीनों की कठोर तपस्या के बाद महादेव ने उन्हें दर्शन दिए। महादेव ने प्रसन्न होकर उन्हें *क्षीर-सागर का स्वामी बना दिया और असीम ज्ञान और समृद्धि* का वरदान दिया। उपमन्यु जी बाद में बहुत बड़े शिवाचार्य बने। इन चारों कथाओं से एक ही बात सीखने को मिलती है - भोलेनाथ भाव के भूखे हैं, उम्र, जाति, बल कुछ नहीं देखते, सच्ची भक्ति देखते हैं। हर हर महादेव 🙏

Post media

Comments (0)

No comments yet. Be the first to comment!