
Rama Devi Sahu
54 days ago
जब प्रभु श्रीराम जी जनकपुरी में धनुष यज्ञ के अवसर पर उपस्थित थे (सीता स्वयंवर), तो वहाँ उपस्थित विभिन्न लोगों ने अपनी-अपनी मनोदशा और दृष्टिकोण के अनुसार प्रभु श्री राम जी के रूप को देखा। मनुष्य की जैसी भावना (सोच या दृष्टिकोण) होती है, उसे ईश्वर या दुनिया वैसी ही दिखाई देती है। यह चौपाई सिखाती है कि दृष्टिकोण बहुत महत्वपूर्ण है। अगर मन में प्रेम और विश्वास है, तो संसार में हर जगह ईश्वर (सकारात्मकता) नजर आते हैं। यदि मन में द्वेष या स्वार्थ है, तो व्यक्ति को हर चीज में कमी या बुराई ही दिखाई देती है। चौपाई राज समाज बिराजत रूरे। उडगन महुँ जनु जुग बिधु पूरे॥ जिन्ह कें रही भावना जैसी। प्रभु मूरति तिन्ह देखी तैसी॥ भावार्थ- वे राजाओं के समाज में ऐसे सुशोभित हो रहे हैं, मानो तारागणों के बीच दो पूर्ण चंद्रमा हों। जिनकी जैसी भावना थी, प्रभु की मूर्ति उन्होंने वैसी ही देखी।

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Jul 17, 2026
🙏🏹 Jai Shree Ram 🏹 Jai Siya Ram 🏹🙏 Suprabhat Ji 🌹🌹

सविता
Jul 7, 2026
प्रभु की कृपा से हर दिन मंगलमय हो। हनुमान जी की शक्ति से सभी संकट दूर हों। शुभ मंगलवार! 🌺
