
Rama Devi Sahu
288 days ago
‼️सुन्दर मूरति दृष्टि परी, तब ये जिय चंचल होय रहा है।🌹 ‼️सोच संकोच सभी जो मिटे, अरु बोल कुबोल सभी जो सहा है।🌹 ‼️रैन दिना मोहि चैन न आवति, नैनन सो जल जात बहा है।🌹 ‼️तापैं कहैं सखि लाज करौ, अब लागि गई तब लाज कहा है।🌹 जब से उस मनोहर मूर्ति (श्रीकृष्ण) के दर्शन हुए हैं, तब से मेरा मन अत्यंत चंचल और व्याकुल हो गया है। अब न अपनी कोई सोच बची है, न संकोच की कोई रेखा।सारे बुरे-भले विचार मन से लुप्त हो चुके हैं। रात-दिन चैन नहीं है, नेत्रों से अश्रुधारा अविरल बह रही है। सखी कहती है--*कुछ तो लज्जा करो।* मैं कहती हूं- "जब प्रियतम को मन समर्पित हो गया, तब लाज की कोई जगह कहां रही ?" कृष्ण🙏 कृष्ण🙏 कृष्ण🙏 कृष्ण🙏 कृष्ण 🙏कृष्ण 🙏कृष्ण🙏 कृष्ण🙏 कृष्ण 🙏🙏कृष्ण🙏कृष्ण🙏कृष्ण🙏
Comments (2)

Rama Devi Sahu
Nov 14, 2025
Jai Shree Shyam 🙏 Subha Sandhya Vandan 🙏🌹🪔🌹🙏

Rakesh Kumar
Nov 14, 2025
jai shree shyam 🙏
