
Rama Devi Sahu
157 days ago
आज खास दिन था—भव्य उत्सव और शोभायात्रा का। जैसे ही मंदिर के मुख्य द्वार खुले, भीड़ में एक अजीब सी शांति छा गई। सबकी नजरें सामने थीं… और फिर वो पल आया।🕉️🙏👇 सुबह का समय था। मंदिर को फूलों, रंगों और दीपों से सजाया गया था। हर तरफ उत्सव का माहौल था। ढोल-नगाड़ों की आवाज़ गूंज रही थी और लोग खुशी से झूम रहे थे। स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान थे भगवान राम, उनके साथ हनुमान। दोनों के चेहरे पर दिव्य तेज था। ऐसा लग रहा था जैसे वे मूर्तियाँ नहीं, बल्कि साक्षात जीवित होकर भक्तों को दर्शन दे रहे हों। भीड़ से एक साथ आवाज़ उठी— “जय श्री राम!” 🚩 लोग फूल बरसाने लगे, रंग उड़ाने लगे। हर कोई उस पल को अपने दिल में कैद करना चाहता था। एक महिला, जो सालों से इस मंदिर में आती थी, रोते हुए बोली, “आज मेरी जिंदगी पूरी हो गई… मैंने अपने भगवान को देख लिया।” शोभायात्रा धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी। लोग नाचते-गाते, भजन गाते हुए साथ चल रहे थे। हर चेहरा खुशी और भक्ति से भरा हुआ था। एक छोटा बच्चा अपने पिता से बोला, “पापा… क्या भगवान सच में हमारे पास आए हैं?” पिता ने मुस्कुराकर कहा, “जब हम सच्चे दिल से बुलाते हैं, तो भगवान जरूर आते हैं।” जैसे-जैसे यात्रा आगे बढ़ी, पूरा माहौल प्रेम और विश्वास से भर गया। उस दिन सबने महसूस किया— भगवान मंदिरों में ही नहीं… अपने भक्तों के दिलों में भी विराजमान होते हैं। ✨🙏
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