
Rama Devi Sahu
113 days ago
*लघु कथा* राजपुर से चंदन नगर एक बस जा रही थी । जब बस अपने डिपो से चल पड़ी तो ठीक सामने सीट पर बैठे एक बुज़ुर्ग जो बहुत अच्छे कपड़े पहने हुए थे, एकाएक खड़े हो गए और बाकी मुसाफिरों का ध्यान अपनी तरफ़ आकर्षित करते हुए कहा ... " मेरे भाइयों और बहनों मैं कोई भिखारी नहीं हूँ । ऊपरवाले ने मुझे अपनी नेक अमतों से नवाजा है , मगर मेरी पत्नी एक लंबी बीमारी से भगवान को प्यारी हो गई, दुर्भाग्य से कुछ दिन पहले मेरी फैक्ट्री में भीषण आग लग गई, मैं इम्पोर्ट एक्सपोर्ट का कारोबार करता हूँ...मेरा सभी माल जलकर खाक़ हो गया , फिर कुछ मुद्दत गुज़री तो मुझे दिल का दौरा पड़ गया । रिश्तेदारों ने जब ये महसूस किया कि इसके बुरे दिन आने लगे हैं तो उन्होंने भी हमसे किनारा कर लिया। डॉक्टरों ने मेरे बचने की उम्मीद कम ही दी है। मेरी ये जवान बेटी है ,मेरे मरने के बाद इसको कोई देखने वाला नहीं रहेगा , कोई इसके आबरू को तार-तार ना करे , यही ग़म ज़्यादा मुझें खाए जा रहा है "........ और उस शख्स की हिचकी बन्ध गई औऱ वो रोने लगा । उसकी बेटी जो उसके पास में ही बैठी थी , उठी और बाप को सहारा देकर सीट पर बैठा दिया ...। कुछ देर बाद बस की पिछली सीट से एक आदमी खड़ा हुआ और कहने लगा...." मेरे दो बेटे हैं , एक डॉक्टर है उसका विवाह हो चुका है और दूसरा ये जो मेरे बगल में बैठा हुआ है , इंजिनियर है, इसके लिये मुझें दुल्हन की तलाश है। मैं उस बुज़ुर्ग से दरख़्वास्त करता हूँ कि ये अपनी बेटी का विवाह मेरे इस बेटे से कर दें। मैं वादा करता हूँ कि बच्ची को ताउम्र कभी बाप की कमी महसूस नहीं होने दूंगा "...... । लड़का भी झट से खड़ा हो गया और उसने कहा मुझे रिश्ता कबूल है क्योंकि मैं अपने पिता का सम्मान करता हूँ । इतना सब होने के बाद बस में मौजूद एक सज्जन खड़े होकर कहने लगे ......." ये सफर बहुत सुहाना सफर है । विवाह जैसा एक शुभ कार्य हो जाए वह भी सफर में इससे अच्छी बात औऱ क्या हो सकती है...? अगर लोगों को ऐतराज़ न हो तो मैं इन दोनों का विवाह करा दूँ ".....। सब कहने लगे वाह वाह क्या बात है हुज़ूर । और उस सज्जन ने चलती बस में ही दोनों का विवाह करा दिया ....। बीच में से एक और साहब खड़े होकर कहने लगे ..." मैं छुट्टी पर अपने घर जा रहा था , अपने घर वालों के लिये लड्डू लेकर , मगर इस मुबारक अवसर को देखकर समझता हूँ कि लड्डू से यहीं सबके मुँह मीठा कराया जाए "। दुल्हन के बाप ने ड्राइवर से कहा ...ड्राइवर साहब, 15 मिनट किसी जगह बस रोक देना ताकि सब मिलकर मुंह मीठा कर लें । ड्राइवर ने कहा ......ठीक है बाबा जी ....। कुछ देर बाद जब अन्धेरा होने लगा तो लड़की के बाप ने ड्राइवर से बस रोकने को कहा ...और सब मुसाफिर मिलकर लड्डू खाने लगे , लड्डू खाते ही कुछ क्षण बाद सब मुसाफिर सो गए। उसके बाद ड्राइवर और कंडक्टर जब नींद से जागे तो अगली सुबह के 6 बज रहे थे । मगर दुल्हन और दूल्हा और उनके दोनो बाप, वो सज्जन और लड्डू बांटने वाला शख्स बस से ग़ायब थे। इतना ही नहीं बल्कि किसी मुसाफिर के पास ना घड़ी, ना चैन ,ना बटुए बल्कि कुछ भी नहीं था। और इस तरह सिर्फ़ इन 6 लोगों का ग्रुप पूरी बस को मुकम्मल तौर पर लूट कर भाग चुका था..... । ज्ञान : कृप्या बिन बुलाये बिना सोचें समझें औऱ बिना निमंत्रण के कहीं किसी भी विवाह में बाराती न बनें , नहीं तो गए काम से..........!! ज्ञान समाप्त....😄🤪
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