
बद्रीप्रसादअसाटी
364 days ago
*हितं यत् सर्वभूतानाम् आत्मन: च सुखावहम्।* *तत् कुर्यात् ईश्वरे हि एतत् मूलं सर्व अर्थ सिद्धये।।* *-महाभारत उद्योगपर्व 11/48* जो समस्त प्राणियों के लिए हितकर और अपने लिए सुखदायक हो, उसे ईश्वरार्पित बुद्धि से करे। सम्पूर्ण सिद्धियों का यही मूलमंत्र है।

Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
