
बद्रीप्रसादअसाटी
304 days ago
*हितं यत् सर्वभूतानाम् आत्मन: च सुखावहम्।* *तत् कुर्यात् ईश्वरे हि एतत् मूलं सर्व अर्थ सिद्धये।।* *-महाभारत उद्योगपर्व 11/48* जो समस्त प्राणियों के लिए हितकर और अपने लिए सुखदायक हो, उसे ईश्वरार्पित बुद्धि से करे। सम्पूर्ण सिद्धियों का यही मूलमंत्र है।

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