
Srikumar महाराज🇮🇳☸️
73 days ago
📖 *`महाराज जी की अमृत वाणी`* *"डर और असुरक्षा (Insecurity) की भावना से कैसे बाहर निकलें?" 🛡️✨* *समाधान:* हमें डर इसलिए लगता है क्योंकि हम खुद को अकेला और इस नाशवान शरीर तक सीमित मान लेते हैं। *महाराज जी कहते हैं—* _"तुम उस सामर्थ्यवान प्रभु के अंश हो, जिसकी मर्जी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता।"_ जब तुम उनके हो गए, तो सुरक्षा की जिम्मेदारी उनकी है। ✨ _भविष्य की चिंता में आज का चैन न खोएं।_ जब भी डर लगे, यह विचार करें कि *"मैं प्रभु का हूँ और प्रभु मेरे हैं।"* यह 'अहं' कि "मैं सब संभाल रहा हूँ" यही डर पैदा करता है। इसे त्यागें और शरणागत हों। । राधे राधे ।।* 🪷
Comments (8)

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Jun 18, 2026
चिंता मत करो, तुम्हारी परी ठीक है। तुम ये करके देखो, एक गिलास दूध में हल्दी पाउडर मिलाकर। अपना ख्याल रखना। मैं तुम्हारी अच्छी सेहत के लिए शाम की नमाज़ पढ़ूंगी।

Riya Riya 💖💖
Jun 18, 2026
भैया जी 🙏🙏मेरा तबियत ठीक नहीं है जी इसलिए मुख्य समय प्रति पोस्ट भी नहीं कर सकती या किसी को कमेंट भी नहीं कर सकती, कमेंट को रिप्लाई भी नहीं कर सकती.. बुखार हुआ ज्यादा खाशी हुआ भैया.. आप अपना ख्याल रखना जी 🙏🙏

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Jun 18, 2026
राधे-राधे श्याम छोटी गुड़िया, जय जगन्नाथ स्वामी, आपका दिन मंगलमय हो धन्यवाद प्रिय 🙏

Riya Riya 💖💖
Jun 18, 2026
राधे राधे जी 🙏🌹 जय जगन्नाथ स्वामी जी 🙏🙏 शुभ प्रभात वंदन भैया जी 🌹🌹🙏🙏

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Jun 18, 2026
appreciate it dear stay blessed to enjoy your day happily 😀🙏

Srikumar महाराज🇮🇳☸️
Jun 18, 2026
चिंता से चतुराई घटे, दुःख से घटे शरीर।लोभ किया से धन घटे, कह गये दास कबीर ॥ अर्थ:चिंता से चतुराई घटे: अधिक चिंता या तनाव करने से व्यक्ति की सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता (चतुराई) कम होने लगती है।दुःख से घटे शरीर: लगातार दुखी रहने या शोक मनाने से शरीर कमजोर और रोगी होने लगता है।लोभ किया से धन घटे: लालच या लोभ करने से अंततः धन की हानि ही होती है। 🙏 dhanyawad

सविता
Jun 18, 2026
v nice story about bhagwan jagannath ji ki 🙏🌹

सविता
Jun 18, 2026
वक्त से पहले और किस्मत से ज्यादा कभी किसी को नहीं मिलता, और जो ईश्वर की मर्जी से मिलता है, उससे खूबसूरत कुछ नहीं होता।"🌹🌷🙏
