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Rama Devi Sahu

8 days ago

मंदिरों में देवी का शृंगार करने का अधिकार स्त्रियों को क्यों नहीं? आखिर देवी को वस्त्र पहनाने और सजाने का काम पुरुष ही क्यों करते हैं? __________ एक सवाल है, जिसका जवाब मैं जानना चाहती हूँ। हमारे मंदिरों में माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी और दूसरी देवी प्रतिमाओं को बड़े प्रेम और श्रद्धा से सजाया जाता है। उन्हें वस्त्र पहनाए जाते हैं, गहने पहनाए जाते हैं, उनके बाल सँवारे जाते हैं, उनका पूरा शृंगार किया जाता है। लेकिन बहुत से मंदिरों में यह सेवा पुरुष पुजारी ही करते दिखाई देते हैं। ___________ तो मेरा सवाल है... क्या स्त्रियाँ अपनी आराध्य देवी का शृंगार नहीं कर सकतीं? क्या वे माँ को अपने हाथों से वस्त्र नहीं पहना सकतीं, उनके गहने नहीं सजा सकतीं, उनकी सेवा नहीं कर सकतीं? _________ जिस स्त्री को हम शक्ति का स्वरूप कहते हैं, जिस देवी की पूजा में हम नारी शक्ति का गुणगान करते हैं, उसी देवी की प्रतिमा को सजाने-सँवारने की सेवा में स्त्रियों की भागीदारी सीमित क्यों दिखाई देती है? _______ अगर कोई महिला पूरी श्रद्धा से देवी का शृंगार करना चाहती है, धार्मिक विधि सीखकर यह सेवा करना चाहती है, तो उसके लिए भी मंदिरों के द्वार खुलने चाहिए। ___________ मैं यह नहीं कहती कि पुरुषों को यह सेवा करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। मेरा सवाल यह है कि जब पुरुष देवी का शृंगार कर सकते हैं, तो योग्य और इच्छुक स्त्रियों को वही अवसर क्यों नहीं मिलना चाहिए? _________ अगर इसका जवाब परंपरा है, तो यह भी समझना होगा कि हर मंदिर की परंपरा एक जैसी नहीं होती। कुछ जगहों पर धार्मिक नियम और सेवा की विशेष व्यवस्थाएँ होती हैं, लेकिन क्या उन व्यवस्थाओं में स्त्रियों की भागीदारी के लिए जगह नहीं बनाई जा सकती? __________ देवी की प्रतिमा को वस्त्र पहनाना केवल हाथों का काम नहीं, श्रद्धा और सेवा का भाव भी है। और यह भाव किसी एक लिंग की जागीर नहीं है। ___________ जब हम देवी को जगत जननी कहते हैं, तो उनकी सेवा करने वाली स्त्रियों को पीछे क्यों रखें? जब हम नारी शक्ति की पूजा करते हैं, तो उसी शक्ति को मंदिर की सेवा में बराबर का अवसर देने पर विचार क्यों न करें? _________ यह किसी पुरुष के अधिकार छीनने की बात नहीं है। यह स्त्रियों को भी वह अधिकार और सम्मान देने की बात है, जिसके लिए वे भी उतनी ही श्रद्धा रखती हैं। ___________ मेरा सवाल आज भी वही है.. मंदिरों में देवी का शृंगार करने, उन्हें वस्त्र धारण कराने और उनकी प्रतिमा की सेवा करने का अवसर स्त्रियों को बराबरी से क्यों नहीं मिलता? __________ अगर आस्था में भेदभाव नहीं होना चाहिए, तो देवी की सेवा में भी स्त्रियों की भागीदारी पर खुलकर बात होनी चाहिए। जय माँ दुर्गा। 🙏🌺

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