
Rama Devi Sahu
4 days ago
*युद्ध के अंत में संजय ने उदास होकर धृतराष्ट्र पूछा - महाराज मैंने रणभूमि का एक एक सच ज्यों का त्यों दिखाया, फिर भी आप समय रहते क्यों नहीं चेते? धृतराष्ट्र ने सिर झुकाकर द्रवित हृदय से कहा - संजय तुमने मुझे आँखों से देखने वाले दृश्य दिखाए लेकिन मन की आंखों से फिर भी अंधा ही रहा और मेरे भीतर का पुत्रमोह मुझे सत्य देखने ही नहीं दे यह था। ज़ब आंखें खुली हों और मानसिक चेतना पर अज्ञान का पर्दा पड़ा हो तो साक्षात् विनाश भी दिखाई नहीं देता। इसलिए शास्त्रों में कहा गया है कि बाहरी दृष्टि से अधिक महत्वपूर्ण मनुष्य का आंतरिक विवेक होता है। ज़ब स्वार्थ हावी हो तो सामने खड़ा साक्षात् सत्य भी दिखाई नहीं देता।* 🌱🌱🌅🌅🌅🌅🌅🌱🌱 *विचार नौका हैं, कार्य पतवार हैं और यात्रा वैतरणी पारकर भगवत धाम जाने की है,* *वैतरणी तक की यात्रा के लिए बेहतर नौका और पतवार चुनिए।* 🌱🌱🌅🌅🌅🌅🌅🌱🌱 *परिधान गेरूआ ही हो यह जरूरी तो नहीं,* *सदगुणी सदगृहस्थ भी किसी सन्त से कम तो नहीं।* 🌱🌱🌅🌅🌅🌅🌅🌱🌱 *अनैतिक व्यक्ति कितना भी मीठा बोले एक दिन हमारे लिए रोग बन जाएगा, अच्छा व्यक्ति कितना भी कड़वा लगे एक दिन औषधि बन कर काम आएगा,* *कभी भी उन बातों और परिस्थिति से निराश मत होना जो हमारे नियंत्रण में नहीं हैं।* 🌱🌱🌅🌅🌅🌅🌅🌱🌱 *लोमड़ी कुत्ते से ज्यादा चालाक होती है, फिर भी लोग कुत्ता पालते हैं क्योंकि,* *रिश्ते वफादारी से चलते है, न कि चालाकियों से....!!* *🙏नमस्कार ☕ शुभप्रभात🙏*
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