
Rama Devi Sahu
449 days ago
🙏‼️ Jai Shree Ram 🙏 Jai Siya Ram ‼️🙏 ******************************************* 🚩🌹 Ramayan Katha 🌹🚩 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 प्रभु को भक्ति-भाव से फल अर्पण भक्त तुलसीदास जी ने अपने भक्तिमूलक ग्रंथ " रामचरितमानस " में भक्ति-भाव से भगवान श्री राम को फल अर्पित करने के चार प्रसंगों का सुंदर उल्लेख किया है। यह चारों प्रसंग वनगमन के समय का है। प्रथम तीन प्रसंग का उल्लेख अयोध्याकांड के अंतर्गत हुआ है , जबकि चौथा माता शबरी का प्रसंग अरण्यकांड के अंतर्गत हुआ है। भक्ति-भाव से भगवान श्री राम को फल अर्पित करने का पहला श्रेय भक्त निषादराज गुह को मिला है। अयोध्या नगर से निकलकर रथ पर सवार श्रीराम अपनी भार्या सीता जी और अपने अनुज लक्ष्मण के साथ श्रृंगवेरपुर पहुंचे हैं। जब यह जानकारी निषादराज गुह को मिलती है , तब गुह को अपार हर्ष होता है और वह फल-मूल(कन्द) लेकर भगवान के दर्शन करने चल पड़ता है। तुलसीदास जी लिखते हैं - लिए फल मूल भेंट भरि पारा। मिलन चलेउ हियं हरषु अपारा।। सुचि फल मूल मधुर मृदु जानी। दोना भरि भरि राखस पानी।। भगवान ने सीता , लक्ष्मण एवं मंत्री सुमंत के साथ फल-मूल ग्रहण किये। सिय सुमंत्र भ्राता सहित कंद मूल फल खाइ। सयन कीन्ह रघुबंसमनि पाय पलोटत भाइ।। मुनि भारद्वाज के आश्रम जब सीता एवं अपने अनुज सहित श्री राम पहुंचे , तब उन्होंने इस प्रकार उन सब का स्वागत किया। कंद मूल फल अंकुर नीके। दिए आनि मुनि मनहुं अमी के।। सिय लखन जन सहित सुहाए। अति रुचि राम मूल फल खाए।। प्रभु श्रीराम जब लक्ष्मण एवं जानकी सहित महर्षि वाल्मीकि जी के आश्रम में पहुंचते हैं , तब वाल्मीकि जी ने उन सब का आतिथ्य-सत्कार इस प्रकार किया - मुनिबर अतिथि प्रानप्रिय पाए। कंद मूल फल मधुर सुहाए। सिया सौमित्रि राम फल खाए। तब मुनि आश्रम दिए सुहाए।। जब प्रभु श्रीराम के चरण भक्ति-परायणा माता शबरी के आश्रम पर पड़े , तब क्या हुआ ? भक्त तुलसीदास जी लिखते हैं - कंदमूल फल सुरस अति दिए राम कहुं आनि । प्रेम सहित प्रभु खाए बारंबार बखानि।। सरलार्थ - (भक्ति परायण माता शबरी ने) अत्यंत रसीले और स्वादिष्ट कंद- मूल, फल लाकर श्रीराम जी को दिए। माता शबरी की भक्ति-भाव से अर्पित फलों को ग्रहण करके प्रभु श्रीराम माता शबरी की बार - बार प्रशंसा करने लगे। " गीतावली " में शबरी-प्रसंग पर तुलसीदास जी लिखते हैं - प्रभु खात पुलकित गात स्वाद सराहि आदर जनु जये। फल चारिहू फल चारि दहि पर चारि फल सबरी दये।। किसी भक्त ने ठीक ही कहा है - तत्वेत्ता तिहूं लोक में भोजन किए अपार। इक शबरी इक विदुर घर रुचि पायो दो बार।। मिथिलेश ओझा की ओर से आपको नमन एवं वंदन। ।। भक्त और भगवान की जय ।।
Comments (2)

प्रेम कुमार
Jun 8, 2025
🙏🙏 राम राम जी 🙏🙏 शुभ प्रभात वंदन 🙏🙏

प्रभा त्रिपाठी
Jun 8, 2025
जय श्री राम राम राम सीताराम सीताराम 🙏
