
Rama Devi Sahu
287 days ago
‼️खंजन नैन फंसे छवि पिंजर, नाहिं रहैं थिर कैसेहु माई। ‼️छूटि गई कुल कानि सखी, "रसखान" लखी मुसुकानि सुहाई।। ‼️चित्र लिखी सी भई सब देह, न वैन कढै मुख दीन्हें दुहाई। ‼️कैसी करुं जित जाऊं तितै, सब बोलि उठैं वह बांवरी आई।। 🥀 एक गोपी कहती है - खंजन पक्षी की भांति श्रीकृष्ण के विशाल नेत्रों ने मुझे पुरी तरह से अपने वश में कर लिया है, अब उनके बिना मुझे चैन नहीं। सखी! उस मोहिनी मुस्कान को देखकर लोक-वेद की मर्यादा स्वत: ही छूट गई है। मेरा शरीर अब मानो एक चित्र के समान हो गया है, जो हिल-डुल नहीं सकता और मेरे मुख से कोई शब्द नहीं निकलते। अब मैं कहां जाऊं ? जहां जाती हूं, सब यही कहते हैं -- "वह बांवरी (पगली) आ गई।" 🙏🙏तेरी मधुर-मधुर मुसुकनियां पे बलिहारी केशव जी🙏🙏
Comments (6)

Rama Devi Sahu
Nov 16, 2025
Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🙏 Subha Ratri Jii 🙏🌹🌹

Rama Devi Sahu
Nov 16, 2025
Radhey Radhey ❤️ Jai Shree Krishna 🙏 Subha Ratri Jii 🙏🌹🌹

Ashutosh Pratap Singh RSS
Nov 16, 2025
जय श्री राधे कृष्ण 🙏

