
Rama Devi Sahu
50 days ago
धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दिन सच्चे मन और विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और जीवन की सारी बधाएं दूर करते हैं. प्रदोष व्रत के प्रभाव से जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। साथ ही मृत्यु के बाद मोक्ष प्राप्त होता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, जुलाई माह का पहला प्रदोष व्रत 12 तारीख को रखा जाएगा. इस दिन रविवार है, इसलिए ये रवि प्रदोष व्रत कहलाएगा। #रवि_प्रदोष_व्रत_की_तिथि: पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जुलाई रविवार को सुबह 2 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगी. वहीं इस तिथि का समापन 12 जुलाई को ही रात 10 बजकर 29 मिनट पर हो जाएगा। प्रदोष काल का समय 12 जुलाई को प्राप्त होगा। इसलिए ये प्रदोष व्रत 12 तारीख को रखा जाएगा। इस दिन रविवार है, इसलिए ये रवि प्रदोष व्रत रहेगा। #2_शुभ_योग_में_रवि_प्रदोष_व्रत: जुलाई के पहले प्रदोष व्रत पर दो शुभ योग बनेंगे. उस दिन वृद्धि योग प्रात:काल से लेकर रात 08 बजकर 06 मिनट तक रहेगा, उसके बाद से ध्रुव योग बनेगा, जो 13 जुलाई को शाम 4 बजे तक रहेगा. व्रत के दिन रोहिणी नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 08:29 ए एम तक है, फिर मृगशिरा नक्षत्र अगले दिन सुबह 5 बजकर 41 मिनट तक है। #रवि_प्रदोष_व्रत_पूजा_शुभ_मुहूर्त: पंचांग के अनुसार, 12 जुलाई को भगवान शिव की पूजा के लिए प्रदोष काल शाम 07 बजकर 36 मिनट से रात 9 बजकर 20 मिनट तक रहेगा. शिव पूजन के लिए भक्तों को कुल 01 घंटे 44 मिनट का समय मिलेगा. धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष काल में विधि-विधान से शिव पूजन और अभिषेक करने से विशेष फल प्राप्त होता है। #रवि_प्रदोष_व्रत_पूजा_विधि: ●रवि प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। ●इसके बाद व्रत का संकल्प लें और पूरे दिन सात्विक जीवनशैली अपनाएं। ●प्रदोष काल में भगवान शिव के शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें। ●इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल और फल अर्पित करें। ●पूजा के दौरान ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें. प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें। ●शिव चालीसा या शिव स्तुति का पाठ करें। ●आखिर में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें और अपनी मनोकामना उनके चरणों में अर्पित करें। #सूर्यास्त_बाद_ही_क्यों_करें_प्रदोष_पूजा! पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रयोदशी के दिन भगवान शिव सूर्यास्त के बाद कैलाश पर प्रसन्न होकर नृत्य करते हैं. इस वजह से प्रदोष व्रत की पूजा सूर्यास्त बाद यानि प्रदोष काल में करते हैं. इससे मनोकानाएं पूरी होने की संभावनाएं अधिक रहती हैं। #रवि_प्रदोष_व्रत_का_धार्मिक_और_ज्योतिषीय_महत्व: रविवार का दिन सूर्यदेव को समर्पित होता है, इसलिए इस दिन प्रदोष व्रत रखने से कुंडली में सूर्य से संबंधित दोषों और समस्याओं को कम करने में भी लाभ मिलता है। #इसका_महत्व_निम्नलिखित_है: गंभीर रोगों से मुक्ति: आयुर्वेद और ज्योतिष के अनुसार, सूर्य आरोग्य (Health) का देवता है। रवि प्रदोष का व्रत करने से पुरानी और गंभीर बीमारियों से छुटकारा मिलता है और व्यक्ति को लंबी आयु प्राप्त होती है। करियर और यश में वृद्धि: जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर है या जिन्हें नौकरी और व्यापार में तरक्की नहीं मिल रही, उनके लिए यह व्रत चमत्कारिक रूप से फलदायी है। मानसिक शांति: शिव जी की कृपा से मन का भटकाव दूर होता है और जीवन में स्थिरता व शांति आती है।

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