
Rama Devi Sahu
72 days ago
'मलमास' को क्यों कहा जाता है 'पुरुषोत्तम मास'? 🌹🚩🌹 जानिए कैसे एक तिरस्कृत महीने को भगवान श्रीकृष्ण ने अपना नाम देकर सभी महीनों में सबसे श्रेष्ठ बना दिया! ।। पुरुषोत्तम मास की उत्पत्ति की पावन कथा ।। ज्योतिष शास्त्र और पुराणों के अनुसार प्रत्येक राशि, नक्षत्र, करण और चैत्र आदि बारह मासों का कोई न कोई स्वामी अवश्य है, लेकिन 'मलमास' (अधिक मास) का कोई स्वामी नहीं था। स्वामी न होने के कारण इस मास में देव कार्य, शुभ कार्य और पितृ कार्य वर्जित माने गए। मलमास की व्यथा: कोई स्वामी न होने और शुभ कार्यों से वर्जित होने के कारण मलमास को हर जगह निंदा और तिरस्कार सहना पड़ता था। सभी उसे असहाय और अपूज्य कहकर लज्जित करते थे। लगातार हो रहे इस अपमान से अत्यंत दुखी और कांतिहीन होकर मलमास रोते हुए वैकुण्ठ लोक में भगवान विष्णु की शरण में पहुँचा। उसने श्री हरि से कहा— "हे कृपानिधे! मैं सभी से तिरस्कृत होकर यहाँ आया हूँ। संसार में सभी क्षण, मुहूर्त, पक्ष और महीनों के अपने-अपने स्वामी हैं और वे आनंद मनाते हैं। लेकिन मैं ऐसा अभागा हूँ जिसका न कोई स्वामी है, न कोई सम्मान। इस घृणा से भरे जीवन से अच्छा है कि मैं अपने प्राण त्याग दूँ।" गोलोक धाम की ओर प्रस्थान: मलमास की यह करुण पुकार सुनकर भगवान विष्णु उसे अपने साथ 'गोलोक धाम' ले गए। वहाँ भगवान श्रीकृष्ण मोरपंख का मुकुट और वैजयंती माला धारण किए, गोपियों के मध्य स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान थे। भगवान विष्णु ने मलमास को श्रीकृष्ण के चरणों में नतमस्तक करवाया और उसकी व्यथा सुनाई। श्रीकृष्ण का अद्भुत वरदान: ✨ मलमास की पीड़ा सुनकर करुणावतार भगवान श्रीकृष्ण ने मुस्कुराते हुए कहा— "हे हरि! आप इसका हाथ पकड़कर मेरे पास लाए हैं। जिसे आपने स्वीकार कर लिया, उसे मैंने भी अपना लिया है। आज से मैं स्वयं इस मास का स्वामी हूँ।" भगवान ने मलमास को वरदान देते हुए घोषणा की— "मैं अपने सभी गुण, कीर्ति, ऐश्वर्य, पराक्रम और वरदान देने की शक्ति इस मलमास को सौंपता हूँ। आज से यह मेरा ही नाम 'पुरुषोत्तम' धारण करेगा और इसी नाम से विख्यात होगा।" पुरुषोत्तम मास का महत्व: श्रीकृष्ण ने आगे कहा— "अब से यह सभी मासों में श्रेष्ठ और पूजनीय होगा। जो भी मनुष्य इस 'पुरुषोत्तम मास' में स्नान, दान, जप, तप और मेरी पूजा करेगा, उसके सभी दुख-दरिद्रता का नाश होगा और उसे मेरे दुर्लभ गोलोक धाम की प्राप्ति होगी। इस मास में किया गया कोई भी पुण्य करोड़ों गुना फल देगा!" इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद से एक तिरस्कृत 'मलमास', संसार का सबसे पवित्र और पूजनीय 'पुरुषोत्तम मास' बन गया। जो इस पवित्र मास का आदर करते हैं, उन पर प्रभु की असीम कृपा सदा बनी रहती है। 🌹🚩🌹

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