
Rama Devi Sahu
229 days ago
#मकर_संक्रांति पर्व : तिथि, पुण्यकाल एवं धर्मसम्मत निर्णय.... मकर संक्रांति #सनातन_धर्म का एक अत्यंत पवित्र और महत्त्वपूर्ण पर्व है। यह पर्व सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने पर मनाया जाता है। इस दिन से सूर्य उत्तरायण होते हैं और देवताओं का दिवस आरंभ माना जाता है। इसी कारण इसे पुण्य, तप, दान और साधना का महापर्व कहा गया है। #सूर्य संक्रमण और तिथि निर्णय शास्त्रीय गणना के अनुसार सूर्य 14 जनवरी की रात्रि 9:39 बजे धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। चूँकि यह संक्रांति रात्रिकाल में घटित हो रही है, इसलिए धर्मशास्त्रों के अनुसार उसी क्षण पर्व मनाना उचित नहीं माना जाता। धर्मग्रंथों में स्पष्ट कहा गया है कि रात्रिकालीन संक्रांति का पुण्यकाल अगले दिन सूर्य उदय से प्रारंभ होता है। अतः मकर संक्रांति का पर्व अगले दिन मनाया जाना शास्त्रसम्मत है। पुण्यकाल मकर संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी को प्रातः सूर्य उदय से लेकर दोपहर 1:39 बजे तक रहेगा। यही समय स्नान, दान, जप, तिल सेवन, खिचड़ी भोग तथा संकल्प के लिए सर्वोत्तम माना गया है। स्नान-दान का महत्त्व इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से समस्त पापों का क्षय होता है और पुण्य की वृद्धि होती है। गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, गोदावरी आदि नदियों में स्नान का विशेष महत्त्व है। जो लोग नदी तक नहीं जा सकते, वे घर पर गंगाजल मिश्रित जल से स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं। दान का फल मकर संक्रांति पर तिल, गुड़, चावल, वस्त्र, कंबल, घी, पात्र, अन्न एवं दक्षिणा का दान अत्यंत फलदायी माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन किया गया दान अनेक गुना फल प्रदान करता है। खिचड़ी और तिल का विधान मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाना, खाना और दान करना शुभ माना गया है। तिल और गुड़ का सेवन शरीर, मन और आत्मा को शुद्ध करता है तथा ग्रह दोषों को शांत करता है। माघ मास और विशेष योग इस वर्ष मकर संक्रांति माघ मास में पड़ रही है तथा वृद्धि योग का संयोग भी बन रहा है। माघ मास में संक्रांति का होना अत्यंत दुर्लभ और अत्यंत पुण्यकारी माना गया है। वृद्धि योग में किया गया हर शुभ कर्म कई गुना फल देता है। पर्व मनाने का शास्त्रीय निर्णय उपरोक्त धर्मशास्त्रीय, ज्योतिषीय और परंपरागत निर्णयों के आधार पर स्पष्ट है कि — मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को ही श्रद्धा, विधि और नियमपूर्वक मनाया जाएगा। 14 जनवरी की रात्रि संक्रांति होने के कारण उस दिन स्नान-दान करना धर्मसम्मत नहीं माना गया है। मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि धर्म, संस्कृति, प्रकृति और साधना का दिव्य संगम है। यह पर्व हमें दान, त्याग, संयम और सदाचार का संदेश देता है। इस पावन अवसर पर प्रत्येक सनातनी को शास्त्रसम्मत विधि से पर्व मनाकर अपने जीवन को पुण्य से परिपूर्ण करना चाहिए..........

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