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Amit

183 days ago

लट्ठमार होली केवल रंगों का उत्सव नहीं… यह राधा-कृष्ण के मधुर प्रेम की जीवित परंपरा है ❤️ कथा के अनुसार — 🔹 भगवान कृष्ण नंदगांव से बरसाना आए 🔹 उन्होंने राधा और सखियों को चिढ़ाया 🔹 तब राधा और उनकी सखियों ने प्रेमपूर्वक लाठियों से उन्हें हँसी-मज़ाक में टोक दिया 🎨💫 और यहीं से शुरू हुई लट्ठमार होली की अनोखी परंपरा 🎉 आज भी — 💛 नंदगांव के पुरुष ढाल लेकर आते हैं 💛 बरसाना की महिलाएँ प्रेम से लाठियाँ चलाती हैं 💛 चारों ओर रंग, हँसी और भक्ति का अद्भुत वातावरण होता है ✨ 🌈 लट्ठमार होली केवल त्योहार नहीं — यह प्रेम, हास्य और भक्ति का संगम है। 📖 पूरी कथा पढ़ें यहाँ 👇 🔗 https://bhajanmarg018.blogspot.com/2026/02/blog-post_28.html⁠�

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