
प्रभा त्रिपाठी
417 days ago
#श्रीरामचरितमानस का रचना प्रसंग गोस्वामी तुलसीदास जी जब श्री रामचरितमानस जी की रचना कर रहे थे तब वे बहुत प्रयत्न करने के बाद भी अपनी रचना को पूर्ण नहीं कर पाए। वह दिन में लिखते और रात में सो जाते । अगली सुबह देखते कि जितना उन्होंने लिखा है वह पूरा मिट गया है। ऐसा करते-करते उन्हें 7 दिन हो गए। आठवें दिन स्वप्न में उन्हें भगवान शंकर ने बोला कि तुम श्री रामचरितमानस की रचना संस्कृत भाषा में ना करो, इसे अवधी भाषा में करो क्योंकि आने वाले समय में संस्कृत भाषा लोगों के लिए समझना बहुत ही दुर्लभ हो जाएगा। तब उन्होंने भगवान शंकर के स्वपनादेश से प्रेरित होकर श्री रामचरितमानस को अवधी भाषा में लिखना प्रारंभ किया। गोस्वामी तुलसीदास जी ने अवधी भाषा में रामचरितमानस की रचना को पूर्ण किया और इसे हिंदू ग्रंथ में शामिल कराने के लिए काशी चले गए। लेकिन वहां काशी के विद्वानों ने श्री रामचरितमानस जी को हिंदू ग्रंथ मानने से अस्वीकार कर दिया, क्योंकि यह अवधि भाषा में लिखा गया था। उनका कहना था की देव ग्रंथ देव भाषा में लिखा होना चाहिए यानी की संस्कृत भाषा में। तब श्री गोस्वामी जी ने काशी के विद्वानों से कहा कि यह मेरी स्वयं की रचना नहीं है यह स्वयं भगवान शंकर ने मुझे स्वप्न में आदेश देकर लिखवाई है। तो सभी विद्वानों ने विचार किया कि इसका निर्णय भी भगवान शंकर पर ही छोड़ते हैं कि इसे हिंदू धर्म का वैदिक ग्रंथ मानना चाहिए या नहीं। इसकी परीक्षा के लिए उन्होंने वेद उपनिषद पुराण और श्री रामचरितमानस को एक पंक्ति के रूप में नीचे से ऊपर रख दिया है जिसमें सबसे नीचे श्री रामचरितमानस को रखा गया और उन्होंने सोचा कि अगर श्री रामचरितमानस सब ग्रंथों के ऊपर आ जाती है तो ही इसे हिंदू धर्म का सर्वोत्तम ग्रंथ माना जाएगा। ऐसे रखकर उन्होंने श्री काशी विश्वनाथ के कपाट बंद कर दिए पूरी रात गोस्वामी तुलसीदास और सभी विद्वान मंदिर के बाहर सोचते रहे कि कल सुबह क्या होने वाला है। अगली सुबह जैसे ही भगवान विश्वनाथ के कपाट खोले गए तो वहां उपस्थित सभी विद्वान और श्री तुलसीदास जी आश्चर्यचकित रह गए। जब वह देखते हैं कि हिंदू धर्म के समस्त ग्रंथ जो ऊपर रखे हुए थे और श्री रामचरितमानस को सबसे नीचे रखा थी। वह सबसे ऊपर पहुंच गया है और जैसे ही उन विद्वानों ने श्री रामचरितमानस को उठाकर प्रथम पृष्ठ खोला तब वह देखते हैं कि उसमें पर भगवान शंकर ने स्वयं हस्ताक्षर कर तीन शब्द लिखे थे। वो शब्द थे? "सत्यम शिवम सुंदरम" अर्थात जो सत्य है वही शिव है और जो शिव है वही सुंदर है। तब सभी ने निर्णय किया कि यह श्री रामचरितमानस सिर्फ ग्रंथ नहीं है भगवान शंकर द्वारा रचित साक्षात उन्हीं का स्वरूप है। इसलिए दोस्तों श्री रामचरितमानस को सिर्फ हिंदू ग्रंथ मानने की भूल ना करें। यह स्वयं भगवान शिव द्वारा लिखित पवित्र और आत्मीय ग्रंथ है। जय श्री राम जय महादेव।

Comments (3)

ranjit chavda
Jul 9, 2025
🔔🔔जय श्री कृष्णा 🔔🔔

प्रेम कुमार
Jul 9, 2025
जय श्री कृष्णा राधे राधे 🌹 शुभ प्रभात वंदन आप का दिन मंगलमय हो 🌹

Deepak karki
Jul 9, 2025
🙏🌹जय श्री राधे कृष्णा राधे राधे शुभ प्रभात जी 🙏🌹
