
Rama Devi Sahu
222 days ago
*🌟 || पात्र की स्वच्छता || 🌟* जीव प्रभु का अंश है इसलिए अव्यक्त रूप से बहुत गुण भी उसके भीतर छिपे हैं। इस प्रकृति में कोई भी जीवन अपात्र एवं मूल्यहीन नहीं है। उस प्रभु के अंशरूप होने के कारण हम सभी पात्र ही हैं पर पात्र की भी समय-समय पर सफाई अवश्य होनी चाहिए। गंदे पात्र में अमृत भी विष बन जायेगा। जीवन के इस पात्र में दुर्गुण, दुराचार एवं अनाचार रूपी कंकड़-पत्थर भरे हों तो सद्गुण एवं सदाचार रूपी रत्न का उसमें प्रवेश संभव नहीं है। प्रभु कथा, सत्संग एवं सदग्रंथों के आश्रय में मन की नित्य सफाई करते रहो, ताकि हमारे मन के पात्र में गंदगी इकट्ठी न हो सके। सदैव निष्कपट, निर्दोष, निर्वैर और सहज बने रहने का प्रयास करते हुए सर्व हिताय का चिन्तन रखो। जिस मन से प्राणी मात्र के मंगल की भावनाएं उठती हैं, मन रुपी वो पात्र स्वच्छ ही समझना चाहिए। पात्र की स्वच्छता ही हमारी पात्रता विकसित करता है। 🙏🚩🌺*जय श्री राधे कृष्ण*🌺🚩🙏

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