
Rama Devi Sahu
7 days ago
🌺 गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है? आखिर भाद्रपद की चतुर्थी को ही क्यों हुआ गणपति बप्पा का आगमन? और आज का विशाल गणेशोत्सव शुरू कैसे हुआ? 🙏 गणपति बप्पा मोरया! 🙏 “क्या आप जानते हैं… गणेश चतुर्थी केवल भगवान गणेश के जन्म का उत्सव नहीं है, बल्कि यह उस दिव्य क्षण की याद है जब स्वयं शक्ति ने अपने पुत्र को जन्म दिया और महादेव ने उसे देवताओं में प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया!” हर वर्ष जब भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी आती है, तो घर-घर में गणपति बप्पा का स्वागत होता है। कहीं ढोल-नगाड़े बजते हैं, कहीं सुंदर मंडप सजते हैं और कहीं भक्त अपने घर में मिट्टी के गणेश जी स्थापित करके कहते हैं— “गणपति बप्पा मोरया!” लेकिन प्रश्न यह है— आखिर गणेश चतुर्थी क्यों मनाई जाती है? इस पर्व की शुरुआत कब हुई? और गणेश जी को सबसे पहले पूजे जाने का रहस्य क्या है? 🌺 माता पार्वती की तपस्या से जन्मे गणेश पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से एक बालक की रचना की और उसमें प्राण डाल दिए। वह बालक केवल मिट्टी की प्रतिमा नहीं था… वह माता पार्वती की शक्ति, ममता और संकल्प का जीवंत स्वरूप था। माता ने उसे आदेश दिया कि जब तक वे स्नान कर रही हैं, कोई भी भीतर प्रवेश न करे। तभी भगवान शिव वहां आए। बालक गणेश ने उन्हें रोक दिया। भगवान शिव ने समझाया कि वे स्वयं पार्वती के पति हैं, लेकिन गणेश अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटे। और फिर हुआ वह प्रसंग जिसने गणेश जी के जीवन को ही बदल दिया। भगवान शिव और बालक गणेश के बीच युद्ध हुआ और क्रोध में महादेव ने गणेश का सिर अलग कर दिया। जब माता पार्वती को यह पता चला, तो उनका क्रोध प्रलयंकारी हो उठा। उन्होंने संपूर्ण सृष्टि को नष्ट करने की चेतावनी दे दी। तब देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की। महादेव ने गणेश को पुनर्जीवन देने का संकल्प लिया और उत्तर दिशा की ओर सबसे पहले मिलने वाले जीव का सिर लाने का आदेश दिया। वह सिर था—हाथी का। हाथी का मस्तक गणेश जी के धड़ पर स्थापित किया गया और वे पुनः जीवित हुए। लेकिन कहानी यहीं समाप्त नहीं होती… 🔱 गणेश बने प्रथम पूज्य भगवान शिव ने गणेश जी को वरदान दिया— “सृष्टि में किसी भी शुभ कार्य का आरंभ तुम्हारी पूजा के बिना पूर्ण नहीं होगा।” इसीलिए गणेश जी को कहा जाता है— विघ्नहर्ता — बाधाओं को दूर करने वाले। बुद्धिदाता — विवेक और ज्ञान देने वाले। सिद्धिविनायक — सफलता प्रदान करने वाले। प्रथम पूज्य — जिनकी पूजा सबसे पहले की जाती है। यही कारण है कि विवाह हो, गृहप्रवेश हो, व्यापार का शुभारंभ हो या कोई धार्मिक अनुष्ठान— सबसे पहले गणेश जी का स्मरण किया जाता है। 🌿 फिर भाद्रपद की चतुर्थी ही क्यों? गणेश चतुर्थी को परंपरागत रूप से भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है। गणेश पुराण और स्कंद पुराण से जुड़ी परंपराओं में इसी तिथि को गणेश जी के प्राकट्य से जोड़ा जाता है। इस दिन भक्त गणेश जी की मूर्ति स्थापित करते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और उन्हें प्रिय मोदक, दूर्वा और लड्डू अर्पित करते हैं। मान्यता है कि गणेश जी का आगमन घर में केवल सुख-समृद्धि ही नहीं, बल्कि बुद्धि, विवेक और शुभ आरंभ का संदेश लेकर आता है। 🪔 लेकिन क्या आज जैसा गणेश उत्सव हमेशा से मनाया जाता था? यहां इतिहास का एक बेहद रोचक अध्याय सामने आता है। गणेश पूजा की परंपरा प्राचीन है, लेकिन आज जिस विशाल सार्वजनिक गणेशोत्सव को हम देखते हैं, उसका आधुनिक स्वरूप विशेष रूप से 19वीं सदी में विकसित हुआ। महाराष्ट्र में गणेश उत्सव की सार्वजनिक परंपराओं के पुराने उदाहरण मिलते हैं और मराठा काल में भी इसका सार्वजनिक स्वरूप दिखाई देता है। बाद में यह उत्सव मुख्यतः घरेलू स्तर पर सीमित हो गया। फिर आया वर्ष— 🇮🇳 1893 लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने गणेशोत्सव को बड़े सार्वजनिक आयोजन का स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका उद्देश्य केवल धार्मिक उत्सव मनाना नहीं था। वे चाहते थे कि समाज के अलग-अलग वर्ग एक स्थान पर एकत्र हों, आपस में जुड़ें और राष्ट्रीय चेतना मजबूत हो। इस प्रकार गणेश जी की भक्ति के साथ-साथ यह उत्सव सामाजिक एकता और जन-जागरण का माध्यम भी बन गया। यही कारण है कि आज गणेश चतुर्थी केवल एक पूजा नहीं… यह भक्ति है। यह संस्कृति है। यह एकता है। यह नई शुरुआत का संदेश है। 🌊 और फिर गणेश विसर्जन क्यों? यह भी अपने भीतर एक

Comments (2)

Rama Devi Sahu
Sep 12, 2026
ॐ गं गणपतए नमः 🙏🌹 भगवान गणेश जी की कृपा आप सपरिवार पर सदा बनी रहे 🙏🌹 शुभ संध्या वंदन जी 🙏🪔🌹

R k jangid phulera Jaipur
Sep 12, 2026
जय श्री गणेश जी की🌹🙏 श्री गणेश जी की कृपा आप पर सदैव बनी रहे शुभ संध्या वंदन 🙏
