
shree gohil
228 days ago
ठकुराइन की जल समाधि 🙏🙏🇮🇳 राजपूत त्याग की अमर गाथा | सन 1971 की सत्य घटना 🇮🇳 वैसे तो हमारा इतिहास राजपूतों के त्याग, दान और बलिदान से भरा पड़ा है, लेकिन सन 1971 की यह घटना हर भारतीय के हृदय को गर्व से भर देती है। चंबल नदी के किनारे सिकरवार राजपूतों का एक गाँव था। वहाँ एक ठकुराइन रहती थीं। उनके पति द्वितीय विश्वयुद्ध में शहीद हुए और पुत्र जयवीर सिंह सन 1965 के युद्ध में देश पर बलिदान हो गए। जयवीर सिंह अपने पीछे पत्नी शारदा और 12 वर्षीय पुत्र सूर्यभान को छोड़ गए। कुछ ही महीनों बाद शारदा भी स्वर्ग सिधार गईं। अब परिवार में केवल सूर्यभान और उसकी बूढ़ी दादी बची थीं। सन 1971 में जब युद्ध के बादल फिर गरजे, तो भारत माता की पुकार पर राजपूतों का खून उबाल मार उठा। गाँव के युवाओं के साथ सूर्यभान भी सेना में भर्ती होने आगरा पहुँचा। संयोगवश भर्ती अधिकारी वही मेजर था, जिसकी बटालियन में जयवीर सिंह सेवा कर चुके थे। मेजर ने सूर्यभान को पहचान लिया। घर की स्थिति जानकर मेजर ने कहा— “बेटा, हम तुम्हें भर्ती नहीं कर सकते। घर जाओ और अपनी दादी की सेवा करो।” सूर्यभान लौट आया। दादी यह सोचकर प्रसन्न थीं कि उनका पोता देश सेवा करेगा। पूरी बात सुनकर दादी ने कहा— “कोई तुझे रोक नहीं सकता। तू सो जा।” अगले दिन दादी ने स्नान कर मंदिर में गाँव वालों को बुलाया। पूरे गाँव में उनकी अपार प्रतिष्ठा थी। ठकुराइन ने सबको संबोधित करते हुए कहा— “मेजर से कहना, मेरी सेवा की चिंता न करें। सबसे बड़ी सेवा भारत माता की सेवा है। वही मेरी भी माता है।” इतना कहकर वह चंबल नदी के गहरे जल में समा गईं और जल समाधि ले ली। गाँव के लोग सूर्यभान को लेकर मेजर के पास पहुँचे और सारी घटना बताई। वहाँ मौजूद हर आँख नम हो गई। मेजर ने सूर्यभान को गले लगाते हुए कहा— “ऐसी राजपूत माताओं ने ही शेरों को जन्म दिया है। राजपूतों ने इतिहास तलवार की धार से लिखा है और लिखते रहेंगे।” 🙏 जय हो ऐसी बलिदानी माँ को 🙏 इतिहास गवाह है—इसीलिए हमारी नारी ‘जगत जननी’ कहलाती है। 👉 यह सत्य घटना है। अधिक से अधिक साझा करें, ताकि देश का हर नौजवान जाने कि राजपूत क्या होता है। 🚩 जय राजपुताना | 🇮🇳 जय हिंद | जय भारत माता 🇮🇳

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