
Rama Devi Sahu
5 hours ago
विदेशों में नदियों की पूजा नहीं होती, उनको साफ सुथरा रख कर ही उनकी इज्जत की जाती है, हमारे भारत में नदियों को जितना गंदा कर सके, उसी को धार्मिक आचरण कहा जाता है। जितनी श्रद्धा उतनी गंदगी फैला सकते हैं। मजाल है विदेश की किसी नदी में कुछ गंदगी आप डाल दे, जेल जाएंगे, लेकिन भारत में सिर माथे होंगे, हमारे घर के बगल से गंगा या कहे हुगली बहती है, शहर की सारी गंदगी, मल मूत्र बहता है, फिर उसी पानी में स्नान होता है, कपड़े धुलते है, पूजा पाठ में काम आता है, चरणामृत बनता है। जीव जंतु की लाश बहती है, हमारे कैंपस की जेट्टी से हमेशा बदबू आती है, मरे पड़े हैं जीव, लाश बहती हुई आती है, जेट्टी पर अटकी रहती है, थोड़ा ज्वार भाटा आया तो वहां से निकल आगे, कहीं और बदबू, यही हुगली, सागर में मिलती है जहां गंगा सागर का मेला लगता है, यानी और गंदगी

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