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Rama Devi Sahu

24 days ago

1-बेलपत्र किस दिन नही तोड़ना चाहिए 2-फूल कब नहीं तोड़ना चाहिए सनातन धर्म और शास्त्रों (विशेषकर शिव पुराण और स्कंद पुराण) में देवी-देवताओं के पूजन के लिए फूल और बेलपत्र तोड़ने के कुछ विशेष नियम और दिन बताए गए हैं। इन नियमों का पालन न करने पर दोष लगता है। यहाँ बताया गया है कि आपको बेलपत्र और फूल कब नहीं तोड़ने चाहिए: बेलपत्र कब नहीं तोड़ना चाहिए? शास्त्रों के अनुसार, कुछ विशेष तिथियों और दिनों में बेल के पेड़ से पत्तियां तोड़ना पूरी तरह वर्जित है। माना जाता है कि इन दिनों में बेलपत्र तोड़ने से शिव जी अप्रसन्न होते हैं: चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथियों को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। संक्रांति के दिन (जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं)। सोमवारके दिन (सोमवार भगवान शिव का दिन है, इसलिए इस दिन बेल के वृक्ष को कष्ट नहीं दिया जाता)। दुपहर के बाद (सूर्यास्त के समय या रात में)** कभी भी बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। खास उपाय अगर सोमवार या इन तिथियों पर आपको शिव जी को बेलपत्र चढ़ाना है, तो आप एक दिन पहले (जैसे रविवार को) ही बेलपत्र तोड़कर रख लें। बेलपत्र कभी बासी या अशुद्ध नहीं होता। यदि नया बेलपत्र न मिले, तो शिवलिंग पर चढ़ा हुआ बेलपत्र भी जल से धोकर दोबारा चढ़ाया जा सकता है। 2. फूल कब नहीं तोड़ना चाहिए? देवताओं की पूजा के लिए फूल तोड़ने के भी कड़े नियम हैं: सूर्यास्त के बाद और रात में: शाम ढलने के बाद पेड़-पौधे सो जाते हैं, इसलिए सूर्यास्त के बाद भूलकर भी फूल या पत्तियां नहीं तोड़नी चाहिए। दुपहर के समय: बारह बजे के बाद या तेज धूप में फूल तोड़ना वर्जित माना गया है। जमीन पर गिरे हुए फूल: जो फूल खुद से टूटकर जमीन पर गिर गए हों, उन्हें पूजा के लिए नहीं उठाना चाहिए (केवल पारिजात या हरसिंगार के फूल अपवाद हैं, जो जमीन से उठाकर भी चढ़ाए जा सकते हैं)। बिना स्नान किए बिना नहाए या गंदे हाथों से पूजा के लिए फूल कभी नहीं तोड़ना चाहिए। ऐसा करने से फूल अपवित्र हो जाते हैं। कली नहीं तोड़नी चाहिए: देवताओं को हमेशा खिले हुए फूल चढ़ाए जाते हैं। इसलिए कली को तब तक न तोड़ें जब तक वह पूरी तरह खिल न जाए (केवल कमल की कली अपवाद है)। फूल और बेलपत्र तोड़ने का सही समय और नियम सर्वश्रेष्ठ समय: फूल और बेलपत्र तोड़ने का सबसे उत्तम समय सूर्योदय से लेकर सुबह के 10-11 बजे तक** (प्रातःकाल) माना जाता है। इस समय तोड़े गए फूल ताजे और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर होते हैं। प्रार्थना करें:पेड़ या पौधे से फूल-पत्ती तोड़ने से पहले मन ही मन वृक्ष से क्षमा मांगनी चाहिए और उनका आभार व्यक्त करना चाहिए। यदि आप किसी विशेष पूजा या व्रत की तैयारी कर रहे हैं, तो इन नियमों को ध्यान में रखकर एक दिन पहले ही सुबह के समय बेलपत्र लाकर रख सकते हैं।

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