
Rama Devi Sahu
50 days ago
पौराणिक कथाओं के अनुसार, वर्तमान बद्रीनाथ धाम मूल रूप से भगवान शिव और माता पार्वती का निवास स्थान था। भगवान विष्णु इसी हिमालयी क्षेत्र में कठोर तपस्या करना चाहते थे। इसलिए माता लक्ष्मी के सुझाव पर उन्होंने एक लीला रची। विष्णु जी ने एक छोटे बालक का रूप धारण किया और वहां बैठकर जोर-जोर से रोने लगे। रोते हुए बालक को देखकर माता पार्वती का हृदय द्रवित हो गया और उन्होंने उसे शरण दे दी। कुछ समय बाद जब शिव और पार्वती स्नान के लिए पास के गर्म जलकुंड गए, तो बालक बने विष्णु जी ने निवास का द्वार अंदर से बंद कर लिया। शिव-पार्वती के लौटने पर विष्णु जी अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट हुए और उस स्थान को अपनी तपस्या के लिए मांग लिया। भगवान शिव ने बिना किसी विरोध के धाम उन्हें सौंप दिया और पार्वती जी के साथ हमेशा के लिए कैलाश पर्वत चले गए। इसके बाद भगवान विष्णु ने वहां हजारों वर्षों तक तपस्या की, जिसमें माता लक्ष्मी ने बदरी (जंगली बेर) वृक्ष का रूप लेकर उनकी रक्षा की। इसी कारण इस स्थान का नाम 'बद्रीनाथ' पड़ा।

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