
Rama Devi Sahu
177 days ago
ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर के रत्नजड़ित नीलचक्र पर लहरा रहे 'पतितपावन बाना' (पवित्र ध्वज) पर गुरुवार को एक बाज(गरुड़) के बैठने की घटना ने करोड़ों श्रद्धालुओं को स्तब्ध कर दिया है। सदियों से चली आ रही इस अटल मान्यता के बीच कि "श्रीमदिर के शिखर के ऊपर से कोई पक्षी नहीं उड़ता", इस दृश्य ने आस्था और आशंकाओं के बीच एक भीषण बहस छेड़ दी है। इसे कोई 'युग परिवर्तन' का संकेत मान रहा है, तो कोई इसे 'महाविनाश' की पूर्व सूचना। भक्तों का एक बड़ा वर्ग इस घटना को सकारात्मक दृष्टि से देख रहा है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, बाज को भगवान विष्णु का वाहन 'गरुड़' माना जाता है। श्रद्धालुओं का कहना है कि कलियुग के बढ़ते प्रभाव के बीच स्वयं गरुड़ देव भगवान जगन्नाथ की रक्षा के लिए नीलचक्र पर विराजमान हुए हैं। पुरी के कई मठों में इसे 'दिव्य सुरक्षा चक्र' के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, भविष्यवाणियों पर शोध करने वालों के बीच आज की यह घटना चिंता का विषय बन गई है। ओडिशा की प्रसिद्ध 'भविष्य मालिका' (संत अच्युतानंद द्वारा रचित) के अनुसार:- अशुभ संकेत: मंदिर के ध्वज पर हिंसक पक्षी का बैठना या ध्वज का गिरना किसी बड़े विश्व युद्ध, प्राकृतिक आपदा या सत्ता परिवर्तन का सूचक माना जाता है। अतीत का साया: भक्त 2020 की उस घटना को याद कर सहमे हुए हैं, जब मंदिर के ध्वज में आग लग गई थी और उसके तुरंत बाद कोरोना जैसी महामारी ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया था। श्रीजगन्नाथ मंदिर को रहस्यों की भूमि माना जाता है। यहाँ का विज्ञान भी उस मान्यता के सामने नतमस्तक है कि मंदिर के गुंबद के ऊपर से पक्षी या विमान नहीं गुजरते। ऐसे में बाज का ध्वज पर आकर बैठना और काफी देर तक टिके रहना, मंदिर की पारंपरिक सुरक्षा और आध्यात्मिक ऊर्जा के नियमों के विरुद्ध माना जा रहा है। #Puri #JagannathTemple

Comments (4)

Rama Devi Sahu
Mar 6, 2026
🌹🌹 Good 😊 Evening Jii 🌹🌹

Rama Devi Sahu
Mar 6, 2026
नीलाचल निवासाय नित्याय परमात्मने। बलभद्र सुभद्राभ्यां जगन्नाथाय ते नमः॥ हिंदी अर्थ: जो भगवान नीलाचल (पुरी) में निवास करते हैं, जो शाश्वत हैं, परमात्मा हैं और जो अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं, उन जगन्नाथ को मैं सादर प्रणाम करता हूँ।

Mayank S
Mar 6, 2026
good afternoon ji

Mayank S
Mar 6, 2026
जय जगन्नाथ 🙏
