
Rama Devi Sahu
311 days ago
*गुरु* *"गुरु" कोई "व्यक्ति" नहीं, कोई "शरीर" नहीं, "गुरु" एक "तत्व" है , एक "शक्ति है" । "गुरु" यदि "शरीर" होता, तो इस छोटी सी "दुनिया" में, एक ही "गुरु" "पर्याप्त" होता । "गुरु" एक "भाव" है, "गुरु" "श्रद्धा" है । "गुरु" "समर्पण" है । आपका "गुरु: आपके "व्यक्तित्व" का "परिचय" है । "कब" "कौन", "कैसे" आपके लिये "गुरु" "साबित" हो, यह आप की "दृष्टि "एवं "मनोभाव "पर निर्भर करता है । "गुरु" "प्रार्थना" से मिलता है । "गुरु" "समर्पण" से मिलता है, "गुरु" "दृष्टा" "भाव" से मिलता है, "गुरु" "किस्मत: से मिलता है । और.......... "गुरु" "किस्मत" वालों को "मिलता" है ।* जय श्रीकृष्ण नमन

Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!
