
राजकुमार पाण्डेय
3 hours ago
🌹शक्ति तत्व 🌹 --------------- नवरात्रि के नौ दिनों में गरवा नृत्य में परिक्रमा करने का आध्यात्मिक , धार्मिक और वैज्ञानिक रुप से गहरा महत्व है। 🔔 आध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्व :- 1. ब्रह्मांड और समय का चक्र :- गरवा में गोल घुमाना ब्रह्मांड की रचना , संचालन और समय के निरंतर चक्र (सृजन, स्थिति और लय ) का प्रतिक हैं । 2. स्थिर केन्द्र और ऊर्जा :- परिक्रमा के केंद्र में गर्भ-दीप ( मिट्टी का छिद्रित घड़ा जिसमें दीपक जलता है) या माता की प्रतिमा रखीं जाती है ,यह दीपक या देवी का स्वरुप "स्थिर केन्द्र " का प्रतीक है। जिसके चारों तरफ यह संसार या जीव चक्कर लगाता हैं । 4. प्रदक्षिणा की परंपरा :- मंदिर में भगवान की परिक्रमा ( प्रदक्षिणा ) की तरह ही गरवा में केन्द्र में स्थापित शक्ति ( देवी दूर्गा ) की परिक्रमा की जाती है।यह देवी के प्रति सम्मान और समर्पण का भाव हैं। 5. 108 परिक्रमा और नक्षत्र :- कई परम्पराओं में गरवा के धड़े पर 27 छेद होते हैं ,जो 27 नक्षत्रों को दर्शाते हैं । इनके अलग-अलग चरणों से मिलकर 108 की पवित्र संख्या बनती है ,जो जप और परिक्रमा की पूर्णता का प्रतिक हैं। 6. अहंकार का त्याग और एकता :- जब सैकड़ों लोग एक साथ गोल घेरे में घुमते है ,तो व्यक्तिगत अहंकार समाप्त हो जाता है और सामुहिक ऊर्जा समानता और भाईचारा पैदा होता हैं। 7. ध्यान जैसी स्थिति :- लगातार एक ही लय में गोल घुमाने और ताली बजाने से मन शांत होता है , ठिक वैसे ही जैसे किसी मंत्र का जाप करने से होता हैं। 8. सकारात्मक ऊर्जा :- संगीत,ताल और वृत्ताकार गति मिलकर शरीर में सकारात्मक ऊर्जा ( शक्ति ) का संचार करती है और तनाव को कम में करती हैं। 9. परिक्रमा मंत्र :- यानि कानि च पापानि, जन्मांतर कृतानि च । तानि तानि प्रनश्यन्ति प्रदक्षिण पदे पदे । मंत्र का अर्थ :- हे जगदम्बे इस जन्म या पिछले जन्मों में जानें अनजाने में मुझसे जो भी पाप हुए हैं , आपकी परिक्रमा ( प्रदक्षिणा ) के प्रत्येक कदम के साथ वे सभी नष्ट हो जाएं। अतः समस्त भाई बन्धु, एवं नर नारी को गरवा नृत्य और परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए। नवरात्रि की बहुत बहुत शुभकामनाएं। ।। पं राजकुमार पाण्डेय।।

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